Kasoor Shayari/अहसास को बयां करती शायरी

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Kasoor Shayari/अहसास को बयां करती शायरी-कसूर का एहसास हर किसी को होता है, कभी किसी के जाने का कसूर होता है, कभी किसी की मोहब्बत में खोने का। यह पोस्ट ऐसे ही कसूर से भरी हुई है, जो हर दिल के दर्द को जुबां देती है। यहाँ दिल को छू लेने वाली कसूर शायरी दी गई है, जिसमें प्यार का दर्द, दिल का कसूर और जज्बातों का इजहार मिलता है। ये शायरी हर उस दिल की आवाज़ है जो किसी के इंतजार में थमा हुआ है, और कसूर में डूबा हुआ है।

कसूर शायरी
दिल का क्या कसूर शायरी
कसूर शायरी इन हिंदी
मेरा क्या कसूर शायरी
बेकसूर शायरी

कसूर शायरी/kasoor shayari/अहसास को बयां करती शायरी
कसूर शायरी/kasoor shayari/अहसास को बयां करती शायरी

कसूर शायरी


1.
कभी मेरी मोहब्बत को समझा ही नहीं,
और कह दिया मुझसे मेरा कसूर है।
Kabhi meri mohabbat ko samjha hi nahi,
Aur keh diya mujhse mera kasoor hai.

2.
हमेशा मेरे हिस्से में कसूर ही आया,
तेरी मोहब्बत का मुझे यही इनाम मिला।
Hamesha mere hisse mein kasoor hi aaya,
Teri mohabbat ka mujhe yahi inaam mila.

3.
तुम्हारे बिना तन्हाईयों का आलम है,
अब यह मत कहना कि इसमें मेरा कसूर है।
Tumhare bina tanhaiyon ka aalam hai,
Ab yeh mat kehna ki isme mera kasoor hai.

4.
तेरी नफरत भी क्या खूबसूरत है,
कि इसमें भी मेरा ही कसूर है।
(Teri nafrat bhi kya khoobsurat hai,
Ki isme bhi mera hi kasoor hai.)

5.
जिंदगी के हर मोड़ पर तेरा नाम लिखा,
और कहते हैं कि इसमें मेरा कसूर है।
Zindagi ke har mod par tera naam likha,
Aur kehte hain ki isme mera kasoor hai.

दिल का क्या कसूर शायरी

दिल का क्या कसूर शायरी
दिल का क्या कसूर शायरी


1.
दिल का कसूर जो तुझे चाहता है,
तेरी हर बेवफाई पर भी मुस्कुराता है।
Dil ka kya kasoor jo tujhe chahta hai,
Teri har bewafai par bhi muskuraata hai.

2.
दिल तो बस प्यार में खो जाता है,
क्या कसूर जो तेरी राह तकता है।
Dil to bas pyaar mein kho jaata hai,
Kya kasoor jo teri raah takta hai.

3.
दिल का कसूर तो तब हुआ जब तुझसे बंध गया,
तेरी नज़रों में ऐसा कसूर क्या हुआ।
Dil ka kasoor to tab hua jab tujhse band gaya,
Teri nazron mein aisa kasoor kya hua.

4.
दिल का कोई कसूर नहीं जो तुझे दिल दे बैठा,
तेरी यादों में यूं उलझा कि सब भूल बैठा।
Dil ka koi kasoor nahi jo tujhe dil de baitha,
Teri yaadon mein yun uljha ki sab bhool baitha.

कसूर शायरी इन हिंदी

कसूर शायरी इन हिंदी
कसूर शायरी इन हिंदी

1.कसूर न मेरा था, न तेरा,
बस किस्मत ने हमें जुदा कर दिया।
Kasoor na mera tha, na tera,
Bas kismat ne hume juda kar diya.

2.
तेरी हर अदाओं का दिल दीवाना हो गया,
अब ये मत कह कि इसमें मेरा कसूर है।
(Teri har adaoon ka dil deewana ho gaya,
Ab yeh mat keh ki isme mera kasoor hai.)

3.
खता तेरी थी, पर सजा मैंने पाई,
कसूर मेरा था, या मोहब्बत की ये रुसवाई।
Khata teri thi, par saza maine paayi,
Kasoor mera tha, ya mohabbat ki yeh ruswayi.

4.
तेरी हर बेवफाई पर भी चुप रहा,
बस यह समझ लो कि दिल का कोई कसूर नहीं।
Teri har bewafai par bhi chup raha,
Bas yeh samajh lo ki dil ka koi kasoor nahi.

मेरा क्या कसूर शायरी

ये दास्ताँ पढ़ें

मेरा क्या कसूर शायरी
मेरा क्या कसूर शायरी

1.
मेरा क्या कसूर जो तेरे प्यार में बंध गया,
तू ही बता, दिल मेरा क्यों तुझसे ही जुड़ गया।
Mera kya kasoor jo tere pyaar mein band gaya,
Tu hi bata, dil mera kyon tujhse hi jud gaya.

2.
जो तेरी बेवफाई के जख्मों से गुजरा,
कह दो उसे कि मेरा क्या कसूर था।
(Jo teri bewafai ke zakhamon se guzra,
Keh do use ki mera kya kasoor tha.)

3.
तेरी चाहत का ऐतबार किया,
कह दो उसे कि मेरा क्या कसूर था।
(Teri chahat ka aitbaar kiya,
Keh do use ki mera kya kasoor tha.)

4.
कभी इस दिल का कसूर नहीं था,
मोहब्बत में मैंने हर रिश्ता निभाया था।
(Kabhi is dil ka kasoor nahi tha,
Mohabbat mein maine har rishta nibhaya tha.)

13.
कसूर तो मेरा था जो मैंने दिल लगाया,
अब तो मैं तन्हाई में जी रहा हूं।
(Kasoor to mera tha jo maine dil lagaya,
Ab to main tanhai mein jee raha hoon.)

14.
तेरे बिना हर लम्हा अधूरा है,
क्या यह भी मेरा कसूर है?
(Tere bina har lamha adhoora hai,
Kya yeh bhi mera kasoor hai?)

15.
दिल की आवाज़ को सुना नहीं मैंने,
कसूर मेरा था जो तुझे भूला नहीं।
(Dil ki awaaz ko suna nahi maine,
Kasoor mera tha jo tujhe bhoola nahi.)

16.
तेरे बिना ये दिल तड़पता है,
क्या कसूर है मेरा जो तुझसे दूर है?
(Tere bina yeh dil tadapta hai,
Kya kasoor hai mera jo tujhse door hai?)

17.
तूने जो किया वो मुझे सता रहा,
क्या कसूर है मेरा जो तुझे चाहा?
(Tune jo kiya wo mujhe sata raha,
Kya kasoor hai mera jo tujhe chaha?)

18.
मेरा क्या कसूर जो मैं तुझे चाहता हूं,
तेरे बिना हर दिन बस तन्हा बिताता हूं।
(Mera kya kasoor jo main tujhe chahta hoon,
Tere bina har din bas tanha bitaata hoon.)

19.
कसूर तो मेरा था जो तुझे चाहा,
अब तो मैं तन्हाई में जी रहा हूं।
(Kasoor to mera tha jo tujhe chaha,
Ab to main tanhai mein jee raha hoon.)

20.
दिल के जज़्बातों को छुपा रखा है,
क्या यह भी कसूर है कि मैं तुझे भूल नहीं सकता?
(Dil ke jazbaaton ko chhupa rakha hai,
Kya yeh bhi kasoor hai ki main tujhe bhool nahi sakta?)

21.
तेरे वादों का कोई मतलब नहीं रहा,
धोखे के इस खेल में अब मेरा क्या कसूर रहा।
(Tere waadon ka koi matlab nahi raha,
Dhokhe ke is khel mein ab mera kya kasoor raha.)

22.
दिल ने तुझ पर विश्वास किया था,
पर तुझे धोखा देकर तूने मुझे तोड़ दिया था।
(Dil ne tujh par vishwas kiya tha,
Par tujhe dhokha dekar tune mujhe tod diya tha.)

23.
किसी ने कहा था मोहब्बत में ऐसा होता है,
पर यह नहीं सोचा था कि इतना दर्द होता है।
(Kisi ne kaha tha mohabbat mein aisa hota hai,
Par yeh nahi socha tha ki itna dard hota hai.)

24.
तेरी यादों में बसा है एक ख्वाब मेरा,
धोखे के इस सच्चाई ने सब कुछ छीन लिया मेरा।
(Teri yaadon mein basa hai ek khwaab mera,
Dhokhe ke is sachai ne sab kuch cheen liya mera.)

25.
तूने जो वादे किए, वो झूठे थे,
मेरे प्यार का जज़्बात, अब सब बिखर गए।
(Tune jo waade kiye, wo jhoothe the,
Mere pyaar ka jazbaat, ab sab bikhra gaye.)

26.
दिल के अरमानों को तुमने तोड़ा,
धोखे के इस जख्म को अब मैं कैसे भुलाऊं?
(Dil ke armaanon ko tumne toda,
Dhokhe ke is zakhm ko ab main kaise bhulau?)

27.
हर लम्हा तेरा ख्याल आता है,
पर तेरे धोखे की याद, मुझे और भी तड़पाता है।
(Har lamha tera khayal aata hai,
Par tere dhokhe ki yaad, mujhe aur bhi tadpata hai.)

28.
तेरी मोहब्बत में मैंने खुद को खो दिया,
पर तुमने तो बस धोखे का जाम पिला दिया।
(Teri mohabbat mein maine khud ko kho diya,
Par tumne to bas dhokhe ka jaam pila diya.)

29.
सपने सजाए थे मैंने तेरे साथ,
अब वो सारे सपने बन गए हैं मात।
(Sapne sajaye the maine tere saath,
Ab wo saare sapne ban gaye hain maat.)

30.
तूने किया विश्वास का मजाक,
अब दिल की हर धड़कन में है बस तेरा अतीत का खौफ।
(Tune kiya vishwas ka mazak,
Ab dil ki har dhadkan mein hai bas tera atit ka khauf.)

31.
क्यों दिया धोखा, जब दिल से चाहा था,
अब मैं खुद को कैसे संभालूं, ये सोचता हूं।
(Kyun diya dhokha, jab dil se chaha tha,
Ab main khud ko kaise sambhalun, ye sochta hoon.)

32.
धोखे की दुनिया में अब कोई सच्चा नहीं,
हर चेहरे पर छिपा है एक झूठा नहीं।
(Dhokhe ki duniya mein ab koi saccha nahi,
Har chehre par chhupa hai ek jhootha nahi.)

33.
तेरे प्यार की सौगात को मैंने समझा था,
पर धोखे की रात ने मुझे बेबस कर दिया था।
(Tere pyaar ki saugaat ko maine samjha tha,
Par dhokhe ki raat ne mujhe bevas kar diya tha.)

34.
दिल के जज़्बातों को समझा नहीं तूने,
अब तन्हाई में अपना दर्द छुपा रखा है।
(Dil ke jazbaaton ko samjha nahi tune,
Ab tanhai mein apna dard chhupa rakha hai.)

35.
धोखे से भरे हैं रिश्तों के इस मंजर में,
किसी को भी नहीं बख्शा दिल के इस जख्म में।
(Dhokhe se bhare hain rishton ke is manzar mein,
Kisi ko bhi nahi baksha dil ke is zakhm mein.)

36.
क्या सच में मोहब्बत ऐसी होती है?
या यह सब बस एक धोखा होता है?
(Kya sach mein mohabbat aisi hoti hai?
Ya yeh sab bas ek dhokha hota hai?)

37.
तेरे बिना जीने की कोशिश में,
धोखे के इस दर्द को छिपाने की कोशिश में।
(Tere bina jeene ki koshish mein,
Dhokhe ke is dard ko chhupane ki koshish mein.)

38.
तूने जो किया वो मुझे तोड़ गया,
क्या यह भी प्यार था या बस एक धोखा?
(Tune jo kiya wo mujhe tod gaya,
Kya yeh bhi pyaar tha ya bas ek dhokha?)

39.
धोखे का ये खेल अब खत्म हो गया,
पर दिल के जख्म अब भी ताज़ा रह गए।
(Dhokhe ka yeh khel ab khatm ho gaya,
Par dil ke zakhm ab bhi taza reh gaye.)

40.
क्या तेरा प्यार सच में सच्चा था?
या बस मेरे जज़्बातों का एक धोखा था?
(Kya tera pyaar sach mein saccha tha?
Ya bas mere jazbaaton ka ek dhokha tha?)

41.
दिल से जो छेड़खानी की थी तुमने,
उसके बाद मेरा क्या कसूर रहा?
(Dil se jo chhedkhani ki thi tumne,
Uske baad mera kya kasoor raha?)

42.
तेरी यादों की बारिश में मैंने खुद को डुबोया,
लेकिन धोखे की बूँदों ने मुझे और भी रोया।
(Teri yaadon ki baarish mein maine khud ko duboya,
Lekin dhokhe ki boondon ne mujhe aur bhi roya.)

43.
दिल के हर कोने में छुपा है तेरा नाम,
पर तूने दिया मुझे धोखा, अब क्या है आराम?
(Dil ke har kone mein chhupa hai tera naam,
Par tune diya mujhe dhokha, ab kya hai aaram?)

44.
सपने जो देखे थे तेरे साथ,
अब वो सारे ख्वाब बन गए हैं मात।
(Sapne jo dekhe the tere saath,
Ab wo saare khwaab ban gaye hain maat.)

45.
तेरे बिना हर रात काली है,
क्या यह भी मेरा कसूर है कि मैं तुझे चाहा?
(Tere bina har raat kaali hai,
Kya yeh bhi mera kasoor hai ki main tujhe chaha?)

46.
दिल के जज़्बातों को छुपा रखा है,
पर तेरे धोखे की याद मुझे कभी ना भुला सकती।
(Dil ke jazbaaton ko chhupa rakha hai,
Par tere dhokhe ki yaad mujhe kabhi na bhula sakti.)

47.
तूने मुझे अपना माना था,
पर अब तेरा धोखा मुझे और भी तोड़ता है।
(Tune mujhe apna maana tha,
Par ab tera dhokha mujhe aur bhi todta hai.)

48.
दिल के जज़्बातों को समझा नहीं तुमने,
अब तन्हाई में मैं खुद को खोजता हूं।
(Dil ke jazbaaton ko samjha nahi tumne,
Ab tanhai mein main khud ko khojta hoon.)

49.
खुद को संभालना अब मुश्किल हो गया,
तेरे धोखे के जख्म को मैं कैसे छुपाऊं?
(Khud ko sambhalna ab mushkil ho gaya,
Tere dhokhe ke zakhm ko main kaise chhupau?)

50.
तेरे बिना हर दिन एक सजा है,
क्या यह भी मेरा कसूर है कि मैंने तुझसे प्यार किया?
(Tere bina har din ek saza hai,
Kya yeh bhi mera kasoor hai ki maine tujhse pyaar kiya?)

51.
तेरे धोखे का जख्म अब भी ताज़ा है,
दिल की गहराइयों में अब भी तेरा नाम लिखा है।
(Tere dhokhe ka zakhm ab bhi taza hai,
Dil ki gehraiyon mein ab bhi tera naam likha hai.)

52.
क्या तेरा प्यार सच में सच्चा था?
या मेरे जज़्बातों का केवल एक मजाक था?
(Kya tera pyaar sach mein saccha tha?
Ya mere jazbaaton ka keval ek mazak tha?)

53.
तूने मुझे धोखा दिया, पर दिल अब भी तेरा है,
इस दर्द के साथ जीने का अब कोई सहारा नहीं।
(Tune mujhe dhokha diya, par dil ab bhi tera hai,
Is dard ke saath jeene ka ab koi sahara nahi.)

54.
तूने जो वादे किए, वो अब यादों में हैं,
धोखे के इस खेल ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
(Tune jo waade kiye, wo ab yaadon mein hain,
Dhokhe ke is khel ne sab kuch barbaad kar diya.)

55.
हर जख्म की एक कहानी है,
तेरे धोखे के साथ मेरा दिल भी तन्हा है।
(Har zakhm ki ek kahani hai,
Tere dhokhe ke saath mera dil bhi tanha hai.)

56.
तेरे बिना जीने की सोचता हूं,
लेकिन तेरे धोखे का ख्याल मुझे और भी तोड़ता है।
(Tere bina jeene ki sochta hoon,
Lekin tere dhokhe ka khayal mujhe aur bhi todta hai.)

57.
क्या तुम्हें एहसास है मेरे दर्द का?
या तुमने इसे बस एक खेल समझा था?
(Kya tumhe ehsaas hai mere dard ka?
Ya tumne ise bas ek khel samjha tha?)

58.
हर धड़कन में तेरा नाम लिखा है,
पर तेरे धोखे की याद ने मुझे तोड़ दिया है।
(Har dhadkan mein tera naam likha hai,
Par tere dhokhe ki yaad ne mujhe tod diya hai.)

59.
धोखे का ये जख्म अब मेरे दिल में है,
क्या इसे मैं कभी भूल पाऊंगा?
(Dhokhe ka yeh zakhm ab mere dil mein hai,
Kya ise main kabhi bhool paaunga?)

60.
तूने जो किया वो एक दाग की तरह है,
दिल में बसी यादों का एक राज की तरह है।
(Tune jo kiya wo ek daag ki tarah hai,
Dil mein basi yaadon ka ek raaz ki tarah hai.)

61.
जब से देखा तुझे, दिल ने तेरा किया शिकार,
पर तेरा धोखा दिल में छोड़ गया एक गहरा जख्म यार।
(Jab se dekha tujhe, dil ne tera kiya shikar,
Par tera dhokha dil mein chhod gaya ek gehra zakhm yaar.)

62.
तेरे इश्क की मिठास अब कड़वा सा लगता है,
तेरे धोखे का साया दिल में हर पल धड़कता है।
(Tere ishq ki mithaas ab kadwa sa lagta hai,
Tere dhokhe ka saaya dil mein har pal dhadakta hai.)

63.
चाँद की रौशनी में तेरा चेहरा दिखता है,
पर सच्चाई के पर्दे में तेरा झूठ छिपता है।
(Chand ki raushni mein tera chehra dikhta hai,
Par sachchai ke parde mein tera jhooth chhita hai.)

64.
वादा किया था हमेशा साथ रहने का,
पर तूने तो धोखा दिया, वो जख्म तो अब है गहरा।
(Waada kiya tha hamesha saath rehne ka,
Par tune toh dhokha diya, wo zakhm toh ab hai gehra.)

65.
तेरे बिना हर सुबह अधूरी सी लगती है,
तेरे वादों का धोखा अब ज़िंदगी में कड़वाहट लाती है।
(Tere bina har subah adhoori si lagti hai,
Tere waadon ka dhokha ab zindagi mein kadwahat laati hai.)

66.
सपनों की दुनिया में अब अंधेरा छा गया,
तेरे धोखे ने दिल का हर रंग उड़ा दिया।
(Sapnon ki duniya mein ab andhera chha gaya,
Tere dhokhe ne dil ka har rang uda diya.)

67.
कसूर किसका है, तेरा या मेरा,
इस प्यार की कहानी में है दर्द का मंजर।
(Kasoor kiska hai, tera ya mera,
Is pyaar ki kahani mein hai dard ka manzar.)

68.
तेरी मोहब्बत में क्या हसीन था पल,
पर धोखे की लहर ने कर दिया मुझे छल।
(Teri mohabbat mein kya haseen tha pal,
Par dhokhe ki lehar ne kar diya mujhe chal.)

69.
तेरे इश्क की किताब में क्या लिखा था,
धोखे का जो राज़ था, वो दिल में चुपा था।
(Tere ishq ki kitaab mein kya likha tha,
Dhokhe ka jo raaz tha, wo dil mein chhupa tha.)

70.
दिल में बसी हैं तेरी यादों की खुसबू,
पर तेरा धोखा है जैसे सर्दी की धुंधू।
(Dil mein basi hain teri yaadon ki khushboo,
Par tera dhokha hai jaise sardi ki dhundhu.)

71.
सपनों में आता है तेरा चेहरा हर रात,
पर जख्मों का साया मुझे सता रहा है हर बार।
(Sapnon mein aata hai tera chehra har raat,
Par zakhmon ka saaya mujhe sata raha hai har baar.)

72.
दिल से निकली ये हसरतें हैं बेइंतहा,
तेरे धोखे ने मुझे तोड़ दिया, क्या करूँ मैं खुदा?
(Dil se nikli ye hasratein hain beinta,
Tere dhokhe ne mujhe tod diya, kya karun main khuda?)

73.
हर दर्द की दवा अब तुझसे ही चाहती हूं,
तेरे धोखे की यादों से मैं खुद को मिटा रही हूं।
(Har dard ki dawa ab tujhse hi chahti hoon,
Tere dhokhe ki yaadon se main khud ko mita rahi hoon.)

74.
क्या ये इश्क था या महज एक खेल,
तेरे धोखे ने मेरी ज़िंदगी में डाल दिया एक मेल।
(Kya ye ishq tha ya mahaz ek khel,
Tere dhokhe ne meri zindagi mein daal diya ek mel.)

75.
तूने जो किया वो जख्म अब ताज़ा है,
किसी और का ख्वाब अब दिल में बसा है।
(Tune jo kiya wo zakhm ab taza hai,
Kisi aur ka khwab ab dil mein basa hai.)

76.
दिल के इस शायर ने तुझसे क्या चाहा था,
तेरे धोखे ने मुझे इस कदर तोड़ दिया।
(Dil ke is shayar ne tujhse kya chaha tha,
Tere dhokhe ne mujhe is kadar tod diya.)

77.
सपनों की परियों से तेरा चेहरा है सजा,
पर सच्चाई के अंधेरे में अब मेरा दिल है भटका।
(Sapnon ki pariyon se tera chehra hai saja,
Par sachchai ke andhere mein ab mera dil hai bhatka.)

78.
तेरे वादों का जादू अब फीका पड़ गया,
धोखे का ये सफर दिल में एक राज़ छोड़ गया।
(Tere waadon ka jadoo ab feeka pad gaya,
Dhokhe ka ye safar dil mein ek raaz chhod gaya.)

79.
धोखे के इस खेल में मैं हूँ बेताब,
क्या तुम समझोगे कभी मेरे दिल की बात?
(Dhokhe ke is khel mein main hoon betaab,
Kya tum samjhoge kabhi mere dil ki baat?)

80.
तेरे बिना सब अधूरा है, दिल की हर साजिश खुल गई,
क्या यह भी मेरा कसूर था, जो तुझसे प्यार हुआ?
(Tere bina sab adhoora hai, dil ki har saazish khul gayi,
Kya yeh bhi mera kasoor tha, jo tujhse pyaar hua?)

81.
तुझसे मिलने की चाहत ने किया मुझे बेकरार,
पर तेरा धोखा रहा मेरे दिल पर एक गहरा वार।
(Tujhse milne ki chahat ne kiya mujhe bekaraar,
Par tera dhokha raha mere dil par ek gehra vaar.)

82.
दिल की हर धड़कन में तेरा नाम बसा था,
तेरे वादों का धोखा अब मुझे तन्हाई का सिला है।
(Dil ki har dhadkan mein tera naam basa tha,
Tere waadon ka dhokha ab mujhe tanhai ka sila hai.)

83.
तेरे बिना रातें अब अधूरी सी लगती हैं,
तेरे धोखे की सजा दिल की गहराइयों में धड़कती हैं।
(Tere bina raatein ab adhoori si lagti hain,
Tere dhokhe ki saza dil ki gehraiyon mein dhadakti hain.)

84.
तेरे इश्क ने किया मुझे बेपनाह दीवाना,
पर तेरे धोखे ने कर दिया मुझे दीवाना।
(Tere ishq ne kiya mujhe bepanaah deewana,
Par tere dhokhe ne kar diya mujhe deewana.)

85.
कितनी खुशियाँ बटोरी थी मैंने तेरे संग,
पर तेरे धोखे ने सब कुछ कर दिया तंग।
(Kitni khushiyan baatori thi maine tere sang,
Par tere dhokhe ne sab kuch kar diya tang.)

86.
सपनों में तेरे साथ जीने की चाह थी,
पर तेरा धोखा अब मेरे दिल में आग लगा गई।
(Sapnon mein tere saath jeene ki chah thi,
Par tera dhokha ab mere dil mein aag laga gayi.)

87.
हर गम की कहानी में तेरा ही जिक्र था,
पर तेरे धोखे ने मुझे तोड़ दिया, ऐसा था असर।
(Har gham ki kahani mein tera hi zikr tha,
Par tere dhokhe ne mujhe tod diya, aisa tha asar.)

88.
तेरे बिना हर खुशी अधूरी सी लगती है,
तेरे धोखे का एहसास अब हर लम्हा सताता है।
(Tere bina har khushi adhoori si lagti hai,
Tere dhokhe ka ehsaas ab har lamha sataata hai.)

89.
तेरे प्यार की खुमारी में मैं खो गया था,
पर तेरे धोखे ने मुझे तन्हा छोड़ दिया था।
(Tere pyaar ki khumari mein main kho gaya tha,
Par tere dhokhe ne mujhe tanha chhod diya tha.)

90.
कसूर किसका है, क्या तेरा या मेरा,
इस दर्द भरी कहानी में हर पल है एक जख्म गहरा।
(Kasoor kiska hai, kya tera ya mera,
Is dard bhari kahani mein har pal hai ek zakhm gehra.)

91.
तूने जो वादे किए, वो सब हुए बेकार,
तेरे धोखे का गहरा असर, दिल में हर बार।
(Tune jo waade kiye, wo sab hue bekaar,
Tere dhokhe ka gehra asar, dil mein har baar.)

92.
तेरे नाम की हर लकीर अब दर्द भरी है,
तेरे धोखे ने दिल की हर बात अधूरी कर दी है।
(Tere naam ki har lakeer ab dard bhari hai,
Tere dhokhe ne dil ki har baat adhoori kar di hai.)

93.
तेरे इश्क की किताब अब धुंधली सी हो गई,
तेरे धोखे की यादें मेरे दिल को चीर गई।
(Tere ishq ki kitaab ab dhundhli si ho gayi,
Tere dhokhe ki yaadein mere dil ko cheer gayi.)

94.
सपनों में जब भी तेरा चेहरा नजर आता है,
दिल के जख्म फिर से ताजा हो जाता है।
(Sapnon mein jab bhi tera chehra nazar aata hai,
Dil ke zakhm fir se taza ho jaata hai.)

95.
तेरे प्यार ने दी थी जो खुशियाँ, वो अब गईं,
तेरे धोखे का असर अब जिंदगी में रह गईं।
(Tere pyaar ne di thi jo khushiyan, wo ab gayi,
Tere dhokhe ka asar ab zindagi mein reh gayi.)

96.
हर सुबह तेरे ख्याल से शुरू होती है,
पर तेरे धोखे की याद में मेरी रात कटती है।
(Har subah tere khyaal se shuru hoti hai,
Par tere dhokhe ki yaad mein meri raat kat ti hai.)

97.
तूने किया जो वादा, वो तो तोड़ा गया,
तेरे धोखे ने दिल में एक नया ग़म छोड़ दिया।
(Tune kiya jo waada, wo toh toda gaya,
Tere dhokhe ne dil mein ek naya gham chhod diya.)

98.
दिल के जख्मों पर अब कोई दवा नहीं,
तेरे धोखे की याद में अब कोई सिला नहीं।
(Dil ke zakhmon par ab koi dawa nahi,
Tere dhokhe ki yaad mein ab koi sila nahi.)

99.
कसूर तो मेरा नहीं, दिल का यही है हाल,
तेरे धोखे ने तोड़ दिया मेरा हर एक जज़्बात।
(Kasoor toh mera nahi, dil ka yahi hai haal,
Tere dhokhe ne tod diya mera har ek jazbaat.)

100.
तूने जो किया, वो सब भूलने का नहीं है,
तेरे धोखे ने दिल को तोड़कर तन्हाई दी है।
*(Tune jo kiya, wo sab bhoolne ka nahi hai,
Tere dhokhe ne dil ko todkar tanhai di hai.)

बेकसूर शायरी

बेकसूर शायरी
बेकसूर शायरी

100.
बेकसूर तो हम थे, फिर भी सजा मिल गई,
दिल में नफरत थी नहीं, फिर भी सजा मिल गई।

101.
हमसे कोई ग़लती नहीं थी, फिर भी तन्हाई मिली,
दिल तो सच्चा था, पर दिल में घमंड की सज़ा मिली।

102.
बेकसूर थे हम, फिर भी दर्द की गवाही मिली,
रूठे थे वो, और हमें सज़ा की साखी मिली।

103.
हर खुशी में जो ग़म मिल जाए,
क्या करें, बेकसूर थे हम, फिर भी ज़िंदगी की सजा मिल जाए।

104.
हमने तो कभी किसी को दिल से नहीं दुखाया,
फिर भी ये इल्जाम हमें ही क्यों आया?

105.
हमारी खामोशी ही ग़लत समझी गई,
बेकसूर होने के बाद भी सजा मिली थी।

106.
ग़लतियाँ तो हमसे नहीं हुईं, फिर भी दिल टूट गया,
बेकसूर थे हम, फिर भी सजा मिली हमें क्या?

107.
तेरे बिना जीने का हौसला था,
फिर भी बेकसूर होने की सजा मिली थी हमें।

108.
हम तो खुद को ही समझा नहीं पाए,
फिर भी बेकसूर होने की सजा बेमानी थी।

109.
बेकसूर थे हम, फिर भी छोड़ दिया हमें,
अब तो हमारे दिल में सिवाय ग़म के कुछ नहीं बचा।

110.
कभी जो प्यार था, वो अब तकरार बन गया,
बेकसूर थे हम, फिर भी ग़मों से भर गया।

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FAQ

💔 कसूर शायरी 
111
कसूर इतना था कि दिल से चाहा था तुम्हें,
वरना हम भी मुस्कुराना जानते थे।

112
हर सजा मुझे ही मिली इस मोहब्बत में,
लगता है कसूर मेरा था… तुम्हें अपना समझ लिया।

113
तुम तो बेदाग निकल गए इस कहानी से,
दाग तो बस मेरे कसूर पर ही लगा।

114
कसूर दिल का था या मेरी चाहत का,
जो हर दर्द ने मुझे ही अपना बना लिया।

115
मैं खामोश रहा तो कसूरवार बना,
और तुम बोलकर भी बेगुनाह रहे।

116
तुम्हें चाहना ही मेरी सबसे बड़ी गलती थी,
अब यही कसूर मेरी सजा बन गया।

117
मेरे कसूर की सजा आज भी भुगत रहा हूँ,
तुम्हें अपना कहने की कीमत चुका रहा हूँ।

118
कसूर मेरा नहीं था, बस दिल सच्चा था,
और सच्चे दिल अक्सर हार जाते हैं।

119
तुम्हें खोकर समझ आया,
कसूर मोहब्बत का नहीं… किस्मत का था।

120
मैंने तो सिर्फ प्यार किया था,
पर कसूर का इल्जाम मेरे नाम हो गया।

121
कसूर ये था कि तुझे खुद से ज्यादा चाहा,
और तूने मुझे एक पल में भुला दिया।

122
मेरे हर दर्द का गवाह है ये दिल,
जिसने बिना कसूर के सजा पाई है।

123
तुम्हारे जाने का इल्जाम भी मुझ पर आया,
शायद कसूर मेरा था… भरोसा किया।

124
कसूर मेरा था कि तुझे अपना समझा,
तू तो सिर्फ एक मुसाफिर निकला।

125
दिल ने गलती की, सजा मुझे मिली,
मोहब्बत की अदालत भी अजीब थी।

126
तुम्हें चाहना अगर कसूर है,
तो ये कसूर बार-बार करूंगा।

127
हर इल्जाम चुपचाप सह लिया मैंने,
क्योंकि कसूर में भी तेरा नाम था।

128
कसूर मेरा नहीं था, बस वक्त खराब था,
जो अपना था वही अजनबी बन गया।

129
दिल ने तुझे अपना कहा,
और यही कसूर मेरी हार बन गया।

130
मेरी खामोशी ही मेरा कसूर बन गई,
और तेरी बेरुखी तेरी आदत बन गई।

😢 मेरा कसूर क्या है शायरी
131
मेरा कसूर क्या है, बस इतना बता दो,
क्यों बिना वजह मुझे सजा दे दी।

132
अगर प्यार करना कसूर था,
तो ये दिल बेवजह गुनहगार बन गया।

133
मेरा कसूर क्या था इस कहानी में,
मैंने तो बस तुम्हें अपना माना था।

134
तुम्हारे जाने के बाद हर सवाल यही पूछता है,
मेरा कसूर क्या था?

135
मैंने वफादारी की,
शायद यही मेरा कसूर था।

136
मुझे छोड़कर तुम खुश हो,
पर मेरा कसूर क्या है… ये आज भी राज है।

137
हर दर्द ने पूछा मुझसे,
तुम्हारा कसूर क्या है?

138
मैंने दिल दिया,
और यही मेरा कसूर बन गया।

139
तुम्हारी खुशी चाही थी,
शायद यही मेरी गलती थी।

140
मेरा कसूर क्या था,
जो तुमने मुझे यादों में छोड़ दिया।

141
मैंने भरोसा किया था,
और भरोसा ही कसूर बन गया।

142
तुम्हारे लिए खुद को बदला,
और खुद को खोना ही कसूर बन गया।

143
मैंने सच्चा प्यार किया,
और यही मेरा सबसे बड़ा कसूर था।

144
तुम्हारी हर बात मानी,
और खुद को भूलना कसूर बन गया।

145
मैंने तुम्हें अपना कहा,
और यही मेरी हार बन गई।

146
मेरा कसूर बस इतना था,
कि मैंने झूठ नहीं सीखा।

147
तुम्हारी हर गलती को अपना समझा,
और खुद ही गुनहगार बन गया।

148
मैंने साथ निभाया,
और तन्हा रहना मेरी सजा बन गई।

149
मेरा कसूर सिर्फ मेरा दिल था,
जो तुम्हारे लिए धड़कता रहा।

150
अब भी इंतजार है जवाब का,
मेरा कसूर क्या था?

😢 Sad Shayar
151
अब किसी से दिल लगाने की हिम्मत नहीं रही,
क्योंकि दर्द देने वाले अपने ही थे।

152
हम हँसते रहे दुनिया के सामने,
और अंदर से टूटते रहे चुपचाप।

153
तुम्हारे बिना अब कोई खुशी अच्छी नहीं लगती,
जैसे जिंदगी अधूरी सी रह गई हो।

154
दिल तो आज भी तुम्हें चाहता है,
बस किस्मत ने साथ देना छोड़ दिया।

155
तन्हाई अब आदत बन गई है,
क्योंकि अपनों ने ही साथ छोड़ दिया।

156
तुम्हारी यादें ही अब सहारा हैं,
वरना जीने की वजह तो खत्म हो गई।

157
हमने सोचा था साथ निभाओगे,
पर तुमने तो रास्ता ही बदल लिया।

158
दिल टूटने की आवाज नहीं होती,
पर दर्द उम्रभर सुनाई देता है।

159
अब किसी से शिकायत नहीं करते,
क्योंकि अपने ही दर्द दे गए।

160
तुम्हें भूलना आसान नहीं,
पर याद करके जीना भी मुश्किल है।

161
खुश दिखने का हुनर सीख लिया हमने,
दर्द तो आज भी वही है।

162
अब किसी पर भरोसा नहीं होता,
क्योंकि भरोसा ही टूट गया।

163
दिल आज भी वहीं रुका है,
जहाँ तुमने छोड़ दिया था।

164
तुम्हारे बिना हर दिन अधूरा लगता है,
जैसे जिंदगी थम सी गई हो।

165
हमने चाहा था तुम्हें दिल से,
और तुमने दिल ही तोड़ दिया।

166
अब आँसू भी चुपचाप बहते हैं,
क्योंकि दर्द समझने वाला कोई नहीं।

167
तुम्हारे बाद अब कोई अपना नहीं लगा,
सब पराया सा लगता है।

168
दिल में दर्द है, पर आवाज नहीं,
क्योंकि अब कोई सुनने वाला नहीं।

169
हम तो आज भी तुम्हारे हैं,
बस तुम किसी और के हो गए।

170
सच में, कुछ दर्द कभी खत्म नहीं होते।

👀 Aankhon Ka Tha Kasoor Shayari 
171
आँखों का था कसूर, दिल को सजा मिल गई,
एक नजर क्या मिली, जिंदगी बदल गई।

172
तेरी आँखों ने ऐसा जादू किया,
दिल मेरा था, पर धड़कन तेरी हो गई।

173
कसूर आँखों का था या तेरी नजर का,
जो दिल मेरा तेरे नाम हो गया।

174
एक नजर ने सब कुछ बदल दिया,
अब हर सांस में तेरा नाम है।

175
आँखों ने इजहार किया,
और दिल गुनहगार बन गया।

176
तेरी आँखों में खोकर खुद को भूल गए,
और यही हमारी हार बन गई।

177
आँखों का कसूर था, दिल मजबूर था,
मोहब्बत का रास्ता ही कुछ ऐसा था।

178
तेरी नजर से नजर क्या मिली,
मेरी दुनिया ही बदल गई।

179
आँखों ने धोखा दिया,
और दिल उम्रभर रोता रहा।

180
एक नजर ने दिल चुरा लिया,
और हम देखते रह गए।

181
आँखों ने चाहा, दिल ने माना,
और हम गुनहगार बन गए।

182
तेरी आँखों का असर आज भी है,
दिल आज भी तेरा इंतजार करता है।

183
कसूर आँखों का था,
जो तुझे अपना समझ लिया।

184
तेरी नजर ने दिल को छुआ,
और दर्द जिंदगी बन गया।

185
आँखों ने इशारा किया,
और दिल ने सब कुछ हार दिया।

186
एक नजर की कीमत उम्रभर चुकाई,
मोहब्बत की सजा पाई।

187
तेरी आँखों में जो सुकून था,
वो कहीं और नहीं मिला।

188
आँखों ने सपना दिखाया,
और हकीकत ने तोड़ दिया।

189
कसूर नजरों का था,
जो दिल तुझ पर आ गया।

190
तेरी आँखों से शुरू हुई कहानी,
और दर्द पर खत्म हो गई।

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