शिकायत शायरी इन हिंदी|एक दर्द भरी कहानी💔”

83 / 100 SEO Score

शिकायत शायरी इन हिंदी|एक दर्द भरी कहानी”-शिकायत और शिकवा हमारी भावनाओं का एक अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल नाराजगी या दुख की अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी गहराई हैं, जिसमें हमारी जिंदगियों के अनुभव छिपे हैं। इस पोस्ट में हम जीवन की कठिनाइयों, ईश्वर से की गई शिकायतों और खुदा के प्रति भावनाओं को व्यक्त करने वाली शायरी प्रस्तुत कर रहे हैं। यहाँ दी गई शायरी में गम, दर्द और मोहब्बत की गहराई है, जो हर दिल को छू लेगी।

शिकायत शायरी इन हिंदी
जिंदगी से शिकायत शायरी
शिकायत शायरी
ईश्वर से शिकायत शायरी
शिकवा शिकायत शायरी इन हिंदी
शिकवा शिकायत शायरी
दो लाइन शिकायत शायरी
भगवान से शिकायत शायरी
हिंदी शिकायत शायरी
खुदा से शिकायत शायरी

जिंदगी से शिकायत शायरी

शिकायत शायरी इन हिंदी|एक दर्द भरी कहानी"
शिकायत शायरी इन हिंदी|एक दर्द भरी कहानी”

1

ज़िंदगी से की थी मैंने एक शिकायत,
हर ख्वाब में क्यों छिपाअंधेरा सा साया।

2

हर सुबह एक नया दर्द लेकर आती है,
ज़िंदगी तु क्यों इतना दर्द देती है ?

शिकायत शायरी इन हिंदी
शिकायत शायरी इन हिंदी

3

चाहा था सुकून में जीना, हर मोड़ पर,
ज़िंदगी, तूने बस रंजो ग़म दिए जिन्दगी भर

शिकायत शायरी इन हिंदी
शिकायत शायरी इन हिंदी

4

रास्ते मेंकांटों की बाड़ लगी,
ज़िंदगी, क्या तूने नहीं समझा मेरी आरज़ू को?

5

दर्द की चादर ओढ़े हैं दिन रात,
ख़ुशी की चाहत में हो रही बर्बाद

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

6

राहों में कितनी मुश्किलें हैं
ज़िंदगी, तेरे साथ चलते-चलते थक गई मैं।

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

7

कभी-कभी सोचती हूँ, क्या ये सब सही है?
ज़िंदगी, तुझे शिकायत करने का कोई हक है क्या?

8

जिंदगी से चाहा था सुकून, मिला दर्द का कारवां,
सपनों जैसी हंसी थी,जिन्दगी हकीकत में वीरान।

9

अधूरी ख्वाहिशें जिंदगी की किताब में, पन्ने रह गए कोरे,
कोशिशें पूरी कीं, फिर भी रह गए अधूरे।

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

10

अनकही बातें लबों पर हंसी, दिल में सन्नाटा,
पूछे जो कोई, कह दूं ‘सब ठीक’ का बहाना।

11

उम्मीदों का सफर सूरज की किरनों में भी, गहरा अंधेरा पाया,
सोचा था खुशी जिन्वदगी से दर्द का मिला साया।

12

बेवजह सवाल कभी सोचा, किससे है ये शिकवा,
खुद से ही नाराज़ हूं, जवाब भी मैं ही हूं।

13

रास्तों की उलझन मंजिल की तलाश में, राहें थीं अंजानी,
सोचता रहा हर मोड़ पर, ये कैसी नादानी।

14

सपनों का बोझ आंखों में थी चमक, पर मन में घुटन,
जिंदगी से सिखाय्त है कब मिटेगी ये जलन

15

तिनका-तिनका जोड़ा, सपनों का महल,
एक पल की आंधी, और सब कुछ हुआ विफल।

16

इंतजार का दर्द सुकून के पल का इंतजार किया हर घड़ी,
जिंदगी ने दिए जवाब, पर सुकून ना मिला कभी।

ईश्वर से शिकायत शायरी

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

17


ऐ ईश्वर, क्या मैंने कुछ गलत किया?
तेरे दर पर आकर भी खड़ा हूँ बस यूँ ही।

18

मन की बात कहूँ, दिल का दर्द बताऊँ,
ऐ भगवान, तेरा शुक्रिया भी तो नहीं भुला हूँ

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

19

क्या तेरा हाथ मुझसे हमेशा रहा दूर?
ऐ खुदा, तुझे मेरी पुकार सुनाई नहीं दी?

20

आँसुओं की एक नदी है मेरे पास,
ईश्वर, क्या तुझे मेरी दुआओं की खबर नहीं है?

21

खोई हैं खुशियाँ मेरे जीवन की राह में,
भगवान, क्या तुझे मेरी चिंता नहीं है?

जिंदगी से शिकायत शायरी
जिंदगी से शिकायत शायरी

22

कितने सवाल हैं, पर जवाब नहीं मिले,
ईश्वर, क्या तूने मेरी क़िस्मत से मुंह मोड़ लिया?

23

जब भी तुम्हें याद किया, मेरा दिल रोया,
ऐ खुदा, क्या तूने मुझे भूलने की कसम खाई?

24

हर बात में तेरी छाया महसूस होती है,
ईश्वर, क्या तुम सिर्फ देख रहे हो, सुन नहीं रहे?

25

किसी ने कहा कि तुम मुझसे दूर नहीं हो,
लेकिन ईश्वर, ये दर्द क्यूँ है।

26

उम्मीद की एक किरण, जो कभी ना मिली,
खुदा, अब तो मेरी आस्था भी दर्द बन गई।

शिकायत शायरी

शिकायत शायरी
शिकायत शायरी

27

शिकायतें अब मेरे दिल का हिस्सा बन गईं,
प्यार की मिठास में कड़वाहट मिल गई।

28

हर हंसी के पीछे छिपा है एक ग़म,
शिकायतों ने दिल को कर दिया है बेदम

29

वक्त ने किया बेवफाई यही शिकायत है,
पल- पल जिन्दगी तुझसे शिकायत है।

30

जब भी तुझे याद किया, मेरी आंखें भर आईं,
शिकायत मेरी खुद से है, तुझे भूल ना पाई।

31

तेरे बिना ये जिंदगी अधूरी है,
शिकायत तो है, पर तुमसे बहुत प्यार भी है।

32

तन्हाई में जब भी सोचा मैंने,
शिकायतें और ग़म सब तुझसे ही जुड़े हैं।

33

जिंदगी की थकान चाहा था सुकून, मिला दर्द का कारवां,
सपनों में हंसी थी, हकीकत में था वीरान।

34

अधूरी ख्वाहिशें जिंदगी की किताब में, पन्ने रह गए कोरे,
कोशिशें पूरी कीं, फिर भी रह गए अधूरे।

35

अनकही बातें लबों पर हंसी, दिल में सन्नाटा,
पूछे जो कोई, कह दूं ‘सब ठीक’ का बहाना।।।

36

बेवजह की फ़िक्र कभी सोचा, किससे है ये शिकवा,?
खुद से ही नाराज़ हूं, जवाब भी मैं ही हूं।

37

मंजिल की तलाश में, राहें थीं अंजानी,
सोचता रहा हर मोड़ पर, ये कैसी नादानी।?

38

सपनों का बोझ आंखों में चमक, मन में घुटन,
जिंदगी से शिकवे, फिर भी अपनापन।

39

ख्वाबों का बिखराव तिनका-तिनका जोड़ा, सपनों का महल,
एक पल की आंधी, और सब कुछ हुआ विफल।

40

इंतजार का दर्द सुकून के पल का इंतजार किया हर घड़ी,
जिंदगी ने दिए जवाब, पर सुकून ना मिला कभी।

भगवान से शिकायत शायरी

भगवान से शिकायत शायरी
भगवान से शिकायत शायरी

41

प्रभु, तेरा दर ना छोड़ा मैंने कभी,
पर मेरी दुआओं का फल कब मिलेगा मुझे?

42

क्या तुझे पता है मेरे दिल की धड़कनें,
भगवान, क्या तुमने मेरी रूह को भूला दिया?

43

खुशियों का वो जश्न कब होगा,
तुझसे की गई मेरी शिकायत अब तो खत्म नहीं होगी।

44

मेरी कहानी में हर मोड़ पर दर्द ही दर्द है,
भगवान, क्या तूने मेरी सुनवाई खो दी है?

45

ज़िंदगी की राह में जब-जब थका,
खुदा, तेरे दर पर ही मैंने सर रखा।

46

उम्मीदों का ये जाल क्या होगा,
भगवान, अब तो बस शिकायतें ही बची हैं।

47

जब भी माँगा तुझसे मैंने प्यार,
खुदा, क्या तूने मेरा दिल तोड़ा नहीं?

48

हर एक आंसू की वजह तुम हो,
भगवान, क्या तुमने मुझे कभी चाहा नहीं?

49

कितनी बार तुझे पुकारा मैंने,
पर खुदा, तेरी आवाज़ तो कभी आई नहीं।

50

तेरे दर पर खड़ा होकर ही समझा मैंने,
शिकायतों का ये सिलसिला अब भी जारी है।

शिकवा शिकायत शायरी इन हिंदी

शिकवा शिकायत शायरी इन हिंदी
शिकवा शिकायत शायरी इन हिंदी

51


हर दिन की शुरुआत शिकायतों से होती है,
तन्हाई में खुद से ही बातें होती हैं।

52

सुकून की तलाश में निकला था जब,
ज़िंदगी ने दी शिकायतों की एक गहरी झील।

53

प्यार में मिले थे तुझसे, अब तो बस दूरियाँ हैं,
शिकवा है मेरे दिल का, क्यूँ तुझसे फासले हैं।

54

तेरी यादों ने कर दिया बेबस मुझे,
शिकवा है तुझसे क्यूँ किया बेबस मुझे

55

जब से तुझसे जुदा हुआ, गम का ये साया है,
शिकवा है तुझसे क्यों मुझे तन्हा छोड़ा है

56

कुछ तो कर जवाब देने के लिए,
इस दुनिया में कोई तो हो मेरा।

57

कभी मुस्कुराया करते थे, अब तो बस ग़म हैं,
शिकवा है मोहब्बत से, तन्हा क्यूँ हम हैं

58

तेरे बिना हर लम्हा खामोश सा है,
किसे सिखायत करें तेरी यादें तड़पा रही हैं,

59

दिल की आवाज़ सुन, क्या तूने नहीं जाना?
शिकवा तो है तुझसे, पर प्यार तुझसे मेरी जाना ।

दो लाइन शिकायत शायरी

दो लाइन शिकायत शायरी
दो लाइन शिकायत शायरी

60


शिकायतें दिल की गहराई से निकली हैं,
जो दर्द है वो सब तेरी यादों से मिली हैं।

61

तन्हाई की रातों में, शिकायतें गूंजती हैं,
मोहब्बत की राहों में, यादें ही रहती हें

दो लाइन शिकायत शायरी
दो लाइन शिकायत शायरी

62

कभी तेरा नाम लूँ, कभी शिकायत करूँ,
फिर भी इस दिल से , तुझसे बेइंतहा प्यार करूँ।

63

तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा लगता है,
सिखाय्मत है तुझसे क्यूँ मोहबत्त है।

64

जब भी तेरा चेहरा याद आता है,
तुझसे सिखाय्त है आखिर क्यूँ तू बेवफा है।?

65

तेरे साथ बिताए हर लम्हे की खुशबू है,
खुद से सिखवा है आखिर क्यूँ तू ही इस दिल में है

66

आंसुओं की कहानी, तन्हाई की चादर ओढ़े,
शिकायतें करते-करते खुद से ही करते हैं बातें।

67

मोहब्बत की राह पर, ख्वाबों की बातें
लेकिन शिकाय है तूने दी दर्द की सौगातें

खुदा से शिकायत शायरी

खुदा से शिकायत शायरी
खुदा से शिकायत शायरी

68

खुदा क्यूँ जिन्दगी में इतना दर्द देता है
जिन्दगी का पल पल बैचेन करता है

69

तेरा घर तो बस एक आस है,
तेरे दर पर कब तक यह तड़पती सांस है।?

70

तेरी राहों में जो मिले थे, वो सब खो गए,7

खुदा, क्या तुमने मेरी खुशियों को भी दफन कर दिया?

71

दुआ की थी मैंने, पर तुझसे जो मिला वो ग़म
खुदा, तेरी दया से गम भूल जाएं हम

72

एक बार तो सुन लो मेरी दास्तान,
खुदा, क्या तुझसे नहीं है मेरे दर्द की पहचान?

73

आँसुओं की गहराई में छुपा है मेरा हाल,
खुदा, क्या तुमने कभी मेरी पुकार का किया है भाल?

74

मेरी दुनिया में तन्हाई के साये हैं,
खुदा, तेरे बिना हर एक पल में केवल शिकायतें हैं।

75

दिल से निकली है ये क़सम, तुझे कभी ना भूलूँगा,
खुदा, इस शिकवे का क्या करूँ, जब मैं तन्हा रहूँगा।

76

खुदा, क्या तूने मेरी रोने की आवाज़ नहीं सुनी?
इस दिल की चीत्कार में क्यों नहीं मिली कोई सुमधुर धुन?

77

हर एक ग़म की परछाई में तेरा ही साया है,
खुदा, मेरी शिकायतें अब एक नई क़िस्मत की दुआ है।

शिकायत शायरी

शिकायत शायरी
शिकायत शायरी

78


तन्हाई की हर रात में शिकायतें हैं बसी,
क्या तुम समझोगे, इस दिल की खामोश दास्तान।

79

मोहब्बत के रास्ते पर जब ठोकर लगी,
शिकायतें मोहब्बत के नाम से होने लगी

80

हर बार जब तुम्हें याद किया, दिल में दर्द हुआ,
शिकायतें उन यादों की, जिसने किसी और का होने न दिया

81

गुजरे हुए लम्हे की याद अब तक दिल में बसी हैं,
लेकिन शिकाय में स्वान्सें सिसकती हैं।

82

मोहब्बत का चाँद छुप गया जब से,
शिकायतें अब तो हैं खुद से

83

हर ग़म की कहानी में तेरा ही चेहरा है,
शिकायतों के साए में, तन्हाई का ये सफर है।

84

हर दिन की शुरुआत एक नई शिकायत से होती है,
पर इस दिल की धड़कन तेरा ही नाम लेती है।

भगवान से शिकायत शायरी

भगवान से शिकायत शायरी
भगवान से शिकायत शायरी

85

ज़िंदगी की मुश्किलों में तेरा ही सहारा चाहा,
पर तेरे दर पर आकर भी खुद को खोया

86

क्या तेरा भी दिल कभी तड़पता है?
भगवान, क्या तूने मुझे तन्हाई में छोड़ दिया?

87

हर एक आंसू में छिपा है एक सवाल,
खुदा, क्या तुझसे मिलना बस एक ख्वाब है?

88

हर दर्द की कहानी में तेरी ही छवि है,
भगवान, क्या तुझे मेरे दुखों की खबर नहीं है?

89

तन्हाई की चादर ओढ़े मैंने खुद से बात की,
भगवान, क्या तुमने मेरी पुकार नहीं सुनी?

90

तेरे नाम की दुआ में मेरी सिसकियाँ हैं,
खुदा, क्या तुझे मेरी ये शिकायतें पसंद हैं?

91

कभी पास आकर मेरी सुन तो सही,
भगवान, क्या तुझे मेरी फ़िक्र नहीं ?

92

खुदा, क्या तूने मेरी खुशियों को चुरा लिया?
तेरी हर दुआ में मेरी दिल की हर शिकायत छुपी है।

93

खुशियों का इंतज़ार करते-करते थक गई,
जिंदगी, क्यों तूने हर पल मुझसे खेला है?

94

तन्हाई में गूंजती है तेरी यादों की आवाज़,
ज़िंदगी, क्या तूने मेरे दर्द को नहीं समझा?

95

हर मुश्किल में तेरा ही साथ माँगा था,
ज़िंदगी, क्या तूने मेरी कोशिशों को नहीं देखा?

96

जज़्बात की गहराई में छिपा है मेरा दर्द,
ज़िंदगी, तुझसे हर पल शिकायत का सिलसिला है।

97

आज भी तुझसे मिलकर, सब कुछ भूल जाना चाहता हूँ,
क्या तूने मेरी मोहब्बत की गहराई नहीं समझी?

98


खुदा, तूने मुझे एक दर्द भरी ज़िंदगी दी,
हर खुशी से पहले एक ग़म की कहानी दी।

99

मेरे हर आंसू में तेरा ही नाम लिखा है,
खुदा, क्या तूने मेरी दुआओं को कभी सुना है

100

तुझसे उम्मीदें रखकर, अब थक चुका हूँ,
, तेरा इंतज़ार करते-करते बर्बाद हो गया हूँ।

101

तन्हाई में ढूंढता हूँ तेरा ही साया,
खुदा, क्या तूने मुझे कभी नहीं अपनाया?

102

कभी तो आ, मेरे दिल की आवाज़ सुन,
खुदा, क्या तेरा दिल भी मुझ पर नहीं पिघलता?

103

तुझसे मिले ख्वाब अब खो गए हैं,
खुदा, क्या तूने मेरी दुआओं का कुछ भी ध्यान नहीं दिया?

104

हर दर्द की कहानी में तेरी ही कमी है,
खुदा, तुझे मेरी हर शिकायत का अहसास नहीं है?

हिंदी शिकायत शायरी

114.
तुझे खोकर शिकायतें और बढ़ गईं,
अब इन शिकायतों का असर दिल में ही रह गया।

115.
तेरे बिना हर पल शिकायत सी लगी,
तू जो था, तो हर बात सुहानी सी लगी।

116.
कभी खुद से शिकायत की, कभी तेरी खामोशी से,
तू चुप है, तो क्यों मैं शिकवा करूं तुझसे?

117.
कभी लगता था, अब कुछ नहीं बचा,
तेरी बेरुखी की शिकायत फिर भी रहती है दिल में।

118.
कभी शिकायत थी तेरे दूर जाने की,
अब शिकायत है कि तू कभी लौटा नहीं।

119.
शिकायतें अब खत्म हो चुकी हैं,
तू जिनका कारण था, अब वो यादें भी खत्म हो चुकी हैं।

120.
प्यार था, उम्मीदें थीं, फिर क्यों शिकायतें आयीं,
जब से तू दूर हुआ, दिल में सिर्फ खालीपन आया।

121.
सिर्फ शिकायत करने का ही वक्त था,
कभी शिकायत को मिटाने का वक्त नहीं आया।

122.
तेरी यादों में शिकायतें बसी हैं,
दिल में वही लकीरें फिर से खींची हैं।

123.
कुछ शिकायतें थीं दिल में, जिन्हें अब समझा,
कभी खुदा से, कभी तुझसे जो वादा किया, वह निभा।

124.
सिकायतों को दिल से निकाल दिया,
लेकिन तेरे बिना किसी भी खुशियों का क्या फायदा?

खुदा से शिकायत शायरी 

114.
खुदा से शिकायत थी, क्यों हमें दर्द दिया,
फिर महसूस किया, वो दर्द ही हमें मजबूत बनाता है।

115.
खुदा से कुछ मांगने की हिम्मत न रही,
पर फिर भी उसने मेरी किस्मत बदल दी, वो मेरी शेरता का कारण था।

116.
कभी खुदा से शिकायत थी कि क्यों इतना दर्द सहना पड़ा,
अब समझ आता है कि यही दर्द हमें सच्चा बनाता है।

117.
खुदा से कोई शिकायत नहीं, बस खुद को खो दिया था,
अब तुझे समझने की कोशिश करता हूँ, ताकि अपना दिल सही पा सकूं।

118.
खुदा से कभी शिकायतें होती थीं, फिर भी,
उसने मुझे जिंदगी की राहें दी, जिनसे मैं कभी डर नहीं सका।

119.
कभी खुदा से शिकायत करता था, फिर समझ आया,
हर मुश्किल का हल खुदा ने तय किया है, वो सबसे बेहतर है।

120.
खुदा से कुछ मांग लिया था, फिर मुझे उसने दिखाया,
राहें और मुश्किलें वो खुद चुनता है, पर उसे पार करना मैं ही सिखाता हूँ।

121.
खुदा से शिकायत करने से क्या मिलता है,
सच्चाई तो यह है, हर दर्द से कुछ सीखा जाता है।

122.
खुदा से जो शिकायतें थीं, उन सबको छोड़ दिया,
अब उसकी चाहत को दिल से महसूस करता हूँ।

123.
कभी खुदा से शिकायतें थी, अब वह समझ गया,
तू जो करता है, वह सबसे अच्छा है, मुझे नसीब में वही है।

124.
खुदा से शिकायत थी, फिर उसने मुझे सिखाया,
कभी दिल टूटता है, तो नए रास्ते पर ले जाता है।

Faqअब किसी से कोई शिकायत नहीं शायरी
ईश्वर से शिकायत शायरी
किसी से कोई शिकायत नहीं है हम खुद
नजरअंदाज शायरी रेख़्ता
Zindagi se shikayat shayari in hindi
Shikayat quotes in hindi on life

## **अब किसी से कोई शिकायत नहीं शायरी 

125
अब किसी से कोई शिकायत नहीं है,
हमें खुद से ही प्यार करना सीख लिया है।
Ab kisi se koi shikayat nahi hai,
Humein khud se hi pyaar karna seekh liya hai.

126
कभी किसी से कुछ पाने की उम्मीद नहीं,
अब खुद से ही उम्मीदें लगाई हैं।
Kabhi kisi se kuch paane ki umeed nahi,
Ab khud se hi umeedein lagaayi hain.

127
अब किसी से कोई शिकायत नहीं है,
दिल की हलचल को हमने शांत किया है।
Ab kisi se koi shikayat nahi hai,
Dil ki halchal ko humne shaant kiya hai.

128
हर दर्द को खुद में समेट लिया है,
अब किसी से कोई शिकायत नहीं है।
Har dard ko khud mein sameet liya hai,
Ab kisi se koi shikayat nahi hai.

129
अब किसी से उम्मीदें नहीं हैं,
खुद को ही जिम्मेदार माना है मैंने।
Ab kisi se umeedein nahi hain,
Khud ko hi zimmedaar maana hai maine.

130
अब किसी से कोई शिकायत नहीं रहेगी,
हम खुद को खुश रखना सीख गए हैं।
Ab kisi se koi shikayat nahi rahegi,
Hum khud ko khush rakhna seekh gaye hain.

131
अब तकलीफों में जो मिलती थी राहत,
अब अपनी खुशी का रास्ता खुद बनाया है।
Ab takleefon mein jo milti thi raahat,
Ab apni khushi ka raasta khud banaya hai.

132
अब किसी से कोई गिला नहीं,
जो हुआ सो हुआ, अब हम खुश हैं।
Ab kisi se koi gila nahi,
Jo hua so hua, ab hum khush hain.

133
अब शिकायत नहीं, सिर्फ समझ है,
जो बीत चुका, वो बीत चुका है।
Ab shikayat nahi, sirf samajh hai,
Jo beet chuka, wo beet chuka hai.

134
अब किसी से शिकायत नहीं,
अब खुद को हर खुशी में ढूंढ़ लिया है।
Ab kisi se shikayat nahi,
Ab khud ko har khushi mein dhoondh liya hai.

## **ईश्वर से शिकायत शायरी 

135
ईश्वर से कभी कोई शिकायत नहीं की,
जो भी दिया है, उसी में खुश रहने की आदत लगी।
Ishwar se kabhi koi shikayat nahi ki,
Jo bhi diya hai, usi mein khush rehne ki aadat lagi.

136
ईश्वर से एक सवाल किया था मैंने,
क्या हमें कभी खुशी पूरी मिल पाएगी?
Ishwar se ek sawaal kiya tha maine,
Kya humein kabhi khushi poori mil paayegi?

137
ईश्वर से मेरी बस एक ही शिकायत है,
कभी दर्द में और कभी अकेले छोड़ दिया है।
Ishwar se meri bas ek hi shikayat hai,
Kabhi dard mein aur kabhi akela chhod diya hai.

138
ईश्वर से कोई शिकायत नहीं है,
जो मुझे दिया है, वह भी बेहद कीमती है।
Ishwar se koi shikayat nahi hai,
Jo mujhe diya hai, woh bhi behad keemti hai.

139
ईश्वर से क्यों शिकायत करें,
जो भी है, उसी में खुश रहें।
Ishwar se kyon shikayat karein,
Jo bhi hai, usi mein khush rahein.

140
ईश्वर से कभी दुख नहीं मांगा,
जो भी मिला, उसे संजोकर रखा।
Ishwar se kabhi dukh nahi maanga,
Jo bhi mila, use sanjokar rakha.

141
ईश्वर से शिकायत तो नहीं है,
बस थोड़ा सा प्यार और वक्त चाहिए।
Ishwar se shikayat to nahi hai,
Bas thoda sa pyaar aur waqt chahiye.

142
ईश्वर से क्यों शिकायत करें,
जो हमें खुदा से मिली है, वह हर बात सही है।
Ishwar se kyon shikayat karein,
Jo humein Khuda se mili hai, woh har baat sahi hai.

143
ईश्वर से एक दुआ की है,
मेरे जीने का कारण बदल दे।
Ishwar se ek dua ki hai,
Mere jeene ka kaaran badal de.

144
ईश्वर से शिकायत नहीं,
अब बस उम्मीदें हैं, और यकीन।
Ishwar se shikayat nahi,
Ab bas umeedein hain, aur yakeen.

## **किसी से कोई शिकायत नहीं है हम खुद

145
किसी से कोई शिकायत नहीं है,
हम खुद अपने रास्ते तय करते हैं।
Kisi se koi shikayat nahi hai,
Hum khud apne raaste tay karte hain.

146
किसी से शिकायत नहीं,
जो भी मिला, सबने कुछ सिखाया।
Kisi se shikayat nahi,
Jo bhi mila, sabne kuch sikhaya.

147
अब किसी से कोई शिकायत नहीं,
हमने खुद को हर दर्द से मजबूत किया है।
Ab kisi se koi shikayat nahi,
Humne khud ko har dard se majboot kiya hai.

148
किसी से शिकायत नहीं,
हमने खुद को समझा लिया है।
Kisi se shikayat nahi,
Humne khud ko samjha liya hai.

149
किसी से कुछ नहीं चाहिए अब,
हम खुद ही अपनी मंज़िल बना लेते हैं।
Kisi se kuch nahi chahiye ab,
Hum khud hi apni manzil bana lete hain.

150
किसी से कोई शिकायत नहीं है,
हमने अपने हिस्से का ख्वाब खुद देखा।
Kisi se koi shikayat nahi hai,
Humne apne hisse ka khwaab khud dekha.

151
किसी से शिकायत नहीं,
जो हुआ सो हुआ, अब कोई भी दुख नहीं है।
Kisi se shikayat nahi,
Jo hua so hua, ab koi bhi dukh nahi hai.

152
किसी से कोई शिकायत नहीं,
हमने खुद को सबसे बड़ा माना है।
Kisi se koi shikayat nahi,
Humne khud ko sabse bada maana hai.

153
किसी से शिकायत नहीं,
अब तो हम खुद से ही सुलझ गए हैं।
Kisi se shikayat nahi,
Ab to hum khud se hi sulajh gaye hain.

154
किसी से कोई शिकायत नहीं,
हम खुद अपनी गलती समझते हैं।
Kisi se koi shikayat nahi,
Hum khud apni galti samajhte hain.

## **नजरअंदाज शायरी रेख़्ता

155
नजरअंदाज होने से दर्द होता है,
जो सच्चे थे, अब वे ही दूर होते हैं।
Najarandaaz hone se dard hota hai,
Jo sachche the, ab wo hi door hote hain.

156
नजरअंदाज करने वालों को समझ नहीं आता,
दिल की गहराईयों में क्या गुजरती है।
Najarandaaz karne walon ko samajh nahi aata,
Dil ki gehraiyon mein kya guzarti hai.

157
नजरअंदाज किया था मुझे,
अब वही खुद अजनबी हो गए हैं।
Najarandaaz kiya tha mujhe,
Ab wahi khud ajnabi ho gaye hain.

158
नजरअंदाज करने से कुछ नहीं मिलता,
बस एक दर्द और ग़म मिल जाता है।
Najarandaaz karne se kuch nahi milta,
Bas ek dard aur gham mil jaata hai.

159
जब नजरअंदाज कर दिया जाता है,
तब दिल में बहुत कुछ टूट जाता है।
Jab najarandaaz kar diya jaata hai,
Tab dil mein bohot kuch toot jaata hai.

160
नजरअंदाज करके लोग बहुत कुछ पा लेते हैं,
पर किसी का दिल तोड़ना कभी नहीं सिख पाते।
Najarandaaz karke log bohot kuch paa lete hain,
Par kisi ka dil todna kabhi nahi seekh paate.

161
नजरअंदाज कर दिया तुमने,
अब न मैं तुमसे शिकायत करता हूँ।
Najarandaaz kar diya tumne,
Ab na main tumse shikayat karta hoon.

162
नजरअंदाज करने वालों को कभी समझ आता नहीं,
दिल की बातें कभी जुबां से नहीं निकलती।
Najarandaaz karne walon ko kabhi samajh aata nahi,
Dil ki baatein kabhi zubaan se nahi nikalti.

163
नजरअंदाज कर दिया तूने मुझसे,
अब वो दिल कभी नहीं मिलता।
Najarandaaz kar diya tune mujhse,
Ab wo dil kabhi nahi milta.

164
नजरअंदाज करने से रिश्ते टूट जाते हैं,
जो कभी न फिर जुड़ पाते हैं।
Najarandaaz karne se rishte toot jaate hain,
Jo kabhi na phir jud paate hain.

## **Zindagi se shikayat shayari in hindi 

165
ज़िन्दगी से शिकायत नहीं,
बस कुछ ख्वाब अधूरे रह गए।
Zindagi se shikayat nahi,
Bas kuch khwaab adhoore reh gaye.

166
ज़िन्दगी से कुछ नहीं चाहिए था,
सिर्फ एक दिन खुश रहना चाहिए था।
Zindagi se kuch nahi chahiye tha,
Sirf ek din khush rehna chahiye tha.

167
ज़िन्दगी की कठिनाइयाँ हैं फिर भी,
शिकायत नहीं, क्योंकि हम तो हिम्मत रखते हैं।
Zindagi ki kathinaiyaan hain phir bhi,
Shikayat nahi, kyunki hum to himmat rakhte hain.

168
ज़िन्दगी से अब कोई शिकायत नहीं,
हमने हर दर्द को अपनी ताकत बना लिया।
Zindagi se ab koi shikayat nahi,
Humne har dard ko apni taqat bana liya.

169
ज़िन्दगी से जो मिला, वो प्यारा था,
कभी शिकायत नहीं की, बस स्वीकार था।
Zindagi se jo mila, wo pyaara tha,
Kabhi shikayat nahi ki, bas swaikar tha.

170
ज़िन्दगी से शिकायत नहीं,
क्योंकि यही वो रास्ता है, जिस पर हम हैं।
Zindagi se shikayat nahi,
Kyunki yahi wo raasta hai, jis par hum hain.

171
ज़िन्दगी की मुसीबतें कभी नहीं रुकती,
पर हम कभी शिकायत नहीं करते।
Zindagi ki musibatein kabhi nahi rukti,
Par hum kabhi shikayat nahi karte.

172
ज़िन्दगी से शिकायत करना नहीं है,
हमें तो हर खुशी को गले लगाना है।
Zindagi se shikayat karna nahi hai,
Humein to har khushi ko galee lagaana hai.

173
ज़िन्दगी में कुछ भी स्थिर नहीं रहता,
पर शिकायत करने से कुछ नहीं बदलता।
Zindagi mein kuch bhi sthir nahi rehta,
Par shikayat karne se kuch nahi badalta.

174
ज़िन्दगी से शिकायत अब नहीं,
हमने हर दर्द को मुस्कान में बदल लिया।
Zindagi se shikayat ab nahi,
Humne har dard ko muskaan mein badal liya.

## **Shikayat quotes in hindi on life

175
शिकायत नहीं, सिर्फ समझ की कमी है,
जिंदगी ने हमें बस रास्ता दिखाया है।
Shikayat nahi, sirf samajh ki kami hai,
Zindagi ne humein bas raasta dikhaya hai.

176
ज़िन्दगी से शिकायत कर के क्या मिलेगा,
जो खो गया, उसे छोड़ देना होगा।
Zindagi se shikayat kar ke kya milega,
Jo kho gaya, use chhod dena hoga.

177
ज़िन्दगी से शिकायत नहीं,
हमेशा नयी राह पर चलना सीख लिया है।
Zindagi se shikayat nahi,
Hamesha nayi raah par chalna seekh liya hai.

178
शिकायतें करना छोड़ दो,
ज़िन्दगी को जैसे है, वैसे अपनाओ।
Shikayatein karna chhod do,
Zindagi ko jaise hai, waise apnao.

179
ज़िन्दगी के बारे में शिकायत क्या करें,
हर पल में कुछ अच्छा होने की उम्मीद रखें।
Zindagi ke baare mein shikayat kya karein,
Har pal mein kuch accha hone ki umeed rakhein.

180
ज़िन्दगी से शिकायत करने वाले,
हर पल के सच्चे रंग को नहीं समझ पाते।
Zindagi se shikayat karne wale,
Har pal ke sachche rang ko nahi samajh paate.

181
कभी जिंदगी से शिकायत नहीं करनी चाहिए,
क्योंकि हर दिन कुछ नया सिखाता है।
Kabhi zindagi se shikayat nahi karni chahiye,
Kyunki har din kuch naya sikhaata hai.

182
ज़िन्दगी में शिकायतें बहुत हैं,
पर उन शिकायतों से ऊपर उठकर ही कुछ बड़ा हासिल होता है।
Zindagi mein shikayatein bohot hain,
Par un shikayon se upar uthkar hi kuch bada hasil hota hai.

183
ज़िन्दगी से अब शिकायत नहीं,
अब हर मुश्किल में भी खुद को देखता हूँ।
Zindagi se ab shikayat nahi,
Ab har mushkil mein bhi khud ko dekhta hoon.

184
शिकायत करने से क्या हासिल होगा,
ज़िन्दगी तो अपनी राह पर ही चलती है।
Shikayat karne se kya hasil hoga,
Zindagi to apni raah par hi chalti hai.

सिखवा

दर्द

Leave a Comment