Bezubaan Par 2 Lain Shaayaree|लुप्त होते जानवरों का दर्द

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Bezubaan Par 2 Lain Shaayaree|लुप्त होते जानवरों का दर्द-इंसानी लालच, अंध-उपभोग और पर्यावरणीय तबाही के कारण धरती से गायब हो चुकी या खतरे में पड़ी कई प्रजातियाँ — उनकी याद में ये शायरियाँ, ताकि कभी उनका दर्द न भूला जाए।शहरों के बढ़ते कंक्रीट, पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय दबाव ने कितने पंखों की उड़ान रोक दी — यह शायरियाँ उसी दर्द को जताती हैं।

दर्द

Bezubaan Par 2 Lain Shaayaree|लुप्त होते जानवरों का दर्द
Bezubaan Par 2 Lain Shaayaree|लुप्त होते जानवरों का दर्द

1.
“हमारी भूख बढ़ी, उनकी जात घट गई,
इंसानों की थाली ने जंगलों की साँस छीन ली।”

2.
“जिनके होने से धरती खूबसूरत थी कभी,
आज वही बेज़ुबान तस्वीरों में कैद होकर जी रहे हैं।”

3.
“अंधाधुंध शिकार ने उनकी पीढ़ियाँ मिटा दीं,
हमने दुनिया बसाई… और उनकी दुनिया छीन ली।”

“बेज़ुबान पर दो लाइन शायरी - लुप्त होती प्रजातियों का दर्द”
“बेज़ुबान पर दो लाइन शायरी – लुप्त होती प्रजातियों का दर्द”

4.
“इंसानी लालच ने जिन्हें जगा नहीं रहने दिया,
वो मौन चीखें अब हवा में तैरती हैं।”

5.
“थोड़ा-सा मांस हमारी जीभ को भा गया,
पर किसी मासूम की पूरी नस्ल मिटा गया “

“बेज़ुबान पर दो लाइन शायरी - लुप्त होती प्रजातियों का दर्द”
“बेज़ुबान पर दो लाइन शायरी – लुप्त होती प्रजातियों का दर्द”

6.
“जंगल उजड़े तो जानवर भी कहीं खो गए,
हमने तरक्की पाई… पर वो घर खो बैठे।”

7.
“किसी की माँ, किसी का बच्चा—हमने सब खा लिया,
फिर पूछते हैं—धरती सूनी-सी क्यों लगती है?”

8.
“बेज़ुबान थे, इसलिए रो न सके,
इंसान थे हम… फिर भी समझ न सके।”

9.
“ज़िंदा रहने का हक़ उनका भी था,
पर इंसान ने इसे अपनी जागीर समझ लिया।”

10.
“वो बोलते नहीं… इसका ये मतलब नहीं कि दर्द नहीं,
इंसान की हर नई चाह ने उनकी साँसें छीन लीं।

लुप्त होते जानवरों का दर्द

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

1.1
“नौ हज़ार से भी ज़्यादा प्रजातियाँ,
हमारी लत पर मिट चुकी — फिर पूछते हैं — धरती क्यों सूनी लगती है।”

12.
“मिलियन Species ख़तरे में, मांस-भक्षण की आग में जल रही,
हमारी आदत , हमारी इंसानियत को दफ़न कर रही।”

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

33.
“पक्षियों की 1430 प्रजातियाँ — बस इतिहास बन चुकी उड़ानें,
हमने बनाया था खाना… उन्होंने खो दी अपनी ज़िंदगी की निशानें।”

14.
“vertebrates 73% घट गए, 50 सालों में जितनी सत्ता बढ़ी,
उसकी आँच में पिघल गए कितने मासूम — किसने पूछा उनकी सच्ची कीमत?”

15.
“लालच की थाली के लिए मांगी जान इतनी,
कि धरती की रूह भी काँप गई — सुनो, बंद करो ये जुर्म का सिलसिला
15.
“दुनिया की लगभग 10 लाख प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं,
हमारी एक गलती — किसी बेज़ुबान की आख़िरी साँस बन जाती है।”

16.
“पिछले 50 सालों में वाइल्ड जीवों की आबादी 73% तक गिर चुकी,
फिर भी इंसान कहता है — ‘हमने क्या बिगाड़ा है इस दुनिया का?’”

17.
“धरती से लगभग 1430 पक्षी हमेशा के लिए ग़ायब हो चुके,
हम आसमान के मुसाफिर खो चुके

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

18.
“IUCN की Red List पर 9760 प्रजातियाँ ‘Critically Endangered’,
धड़कनें कम नहीं हुईं — बस वो दिल कम हो गए जो धड़कते थे जंगलों में।”

19.
“हर साल 1–2% प्रजातियाँ चुपचाप ख़त्म हो रही हैं,
इंसानियत अपनी मौत कर रही है।”

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

20.
“धरती के 80 लाख जीवों में से 22% जानवर अब सुरक्षित नहीं,
हमारी भूख बढ़ी — पर उनकी ज़िंदगियाँ लगातार घटती गईं।”

21.
“मांस उद्योग अकेले 14.5% ग्रीनहाउस गैस बढ़ाता है,
इंसान थाली भरता रहा — धरती अपनी साँसें खोती रही।”

22.
“सिर्फ पिछले 10 सालों में 100+ स्तनधारी प्रजातियाँ खतरे में गईं,
हमारी तरक्की तेज़ हुई — पर उनकी धड़कनें धीमी पड़ गईं।”

23.
“हर दिन 200 प्रजातियाँ दुनिया से गायब हो जाती हैं,
इतने सन्नाटे के बाद भी — इंसान शोर मचाए बैठा है कि ‘सब ठीक’ है।”

24.
“जंगलों का 420 मिलियन हेक्टेयर हिस्सा इंसान खा गया,
पेड़ नहीं कटे — बेज़ुबान अपने घर से बेघर हो गए।”

25.
“हाथियों की संख्या पिछले 100 सालों में 90% तक गिर चुकी,
मगर इंसान अब भी दाँतों के लिए उनकी मौत खरीदता है।”

26.
“पिछली सदी में 95% बाघों का सफाया हम ही ने किया,
जंगल से शेर नहीं गए — इंसान की इंसानियत चली गई।”

27.
“समुद्र के जीवों में से एक-तिहाई प्रजातियाँ खतरे में,
लहरें आज भी वही हैं — पर उनमें जीने वाले खोते जा रहे हैं।”

28.
“पिछले 50 सालों में वनक्षेत्र 10 करोड़ हेक्टेयर कम हुआ,
इंसान ने मकान बनाए — बेज़ुबानों ने अपनी दुनिया खो दी।”

29.
“प्रति वर्ष 70 अरब जानवर भोजन बनते हैं,
दुनिया भूखी नहीं — इंसान का लालच बेहिसाब है।”

30.
“लाखों जीव मर रहे हैं — पर आंकड़े रोते नहीं,
रोना तो उन आँखों को चाहिए — जो अब भी देख कर अनदेखा कर रही हैं।”

31.
“धरती का 50% पेड़ इंसानों ने काट दिए,
और हैरानी ये कि बेज़ुबान को अब भी दोष दिया जाता है जंगली होने का।”

32.
“हर 5 में से 1 जीव विलुप्ति के मुहाने पर है,
हमारी प्रगति तेज़ हुई — पर उनकी साँसें थमने लगीं।”

33.
“महासागरों में 40% जीव-जंतु घट चुके,
समुद्र का नीला रंग हम खो चूके ।”

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

34.
“धरती का 60% वन्यजीवन सिर्फ 50 साल में खो गया,
इंसान आसमान छू गया — पर जमीन खो बैठा।”

35.
“प्रति वर्ष 1.1 करोड़ हेक्टेयर जंगल काटे जाते,
हर कटे पेड़ के साथ — हजारों बेज़ुबान घर खोकर मर जाते।”

36.
“40% उभयचर (Amphibians) अब ‘खतरे’ की सूची में हैं,
बारिश वही है — पर टर्र-टर्र की आवाज़ें कहीं गुम हो गईं।”

37.
“दुनिया भर में 7000+ प्रजातियाँ अवैध शिकार की शिकार,
कुछ भूख में मरे — कुछ इंसानी शान की चपेट में।”

38.
“8 लाख प्रजातियाँ सीधा extinction की ओर,
इतनी मौतों के बाद भी — इंसान खुद को बुद्धिमान कहता है।”

39.
“पिछले 500 साल में 900+ प्रजातियाँ हमेशा के लिए मिट गईं,
इतिहास भरता गया — पर जंगल खाली होते गए।”

40.
“लगभग 6000 प्रजातियाँ ‘अत्यधिक खतरे’ में दर्ज,
एक सूची बढ़ती रही — पर इंसानों की संवेदना घटती रही।”

41.
“कछुओं की 61% प्रजातियाँ खत्म होने की कगार पर,
समुद्र ने रास्ते दिए — इंसानों ने जाल बिछा दिए।”

42.
“दुनिया का 75% प्राकृतिक आवास नष्ट हो चुका,
कुछ कंक्रीट से मिटे — कुछ इंसानी उम्मीदों से।”

43.
“गिद्धों की 95% आबादी भारत में घट चुकी,
आसमान आज भी ख़ामोश है — पर ज़हर इंसानों ने फैलाया।”

44.
“15000 प्रजातियाँ habitat loss का शिकार,
घर सिर्फ इंसानों को चाहिए थे — बाकी बेज़ुबान बेघर हो गए।”

45.
“हर साल 30,000 से ज़्यादा हाथी शिकार में मारे जाते,
सोने जैसे दिल वालों को — इंसान ने दाँतों की कीमत पर बेचा।”

46.
“48% स्तनधारी प्रजातियाँ future extinction risk पर हैं,
धरती नहीं बदली — इंसानों का रवैया बदल गया।”

47.
“25% समुद्री स्तनधारी अब खतरे में,
गहराइयाँ वही हैं — पर भीतर की ज़िंदगियाँ टूटी हुई।”

48.
“लगभग 17% अमेज़ॉन जंगल इंसान निगल चुका,
फेफड़ों को काटते-काटते — हवा भी दुखी हो गई।”

49.
“बाघों की संख्या अपने पुराने दौर से 95% कम,
जंगल बचे नहीं — और हम सोचते रहे कि शेर कहाँ गए।”

50.
“धरती की हर छठी प्रजाति आने वाले समय में गायब होगी,
हम विकास चाहते रहे — पर अस्तित्व की फाइलें बंद होती गईं।”

51.
“धरती के 96% स्तनधारी अब इंसानों और उनके पालतू जानवरों में बदल गए,
जंगली जीवन बस किताबों में बचा — असल में बहुत कुछ खो गया।”

52.
“1 लाख प्रजातियाँ हर साल विलुप्ति की ओर बढ़ती,
इंसान आगे बढ़ा — पर प्रकृति पीछे छूटती गई।”

53.
“2050 तक 10 लाख प्रजातियाँ गायब हो सकती हैं,
जिन्हें बनाने में प्रकृति ने लाखों वर्ष लगा दिए।”

54.
“अवैध वन्यजीव व्यापार का बाजार 20 अरब डॉलर पार,
बेज़ुबान बिके — और इंसान मालामाल हो गया।”

55.
“धरती का ⅓ मीठा पानी प्रदूषण से जहर बन चुका,
जो कभी जीवन देता था — अब मौत बन रहा है।”

56.
“विश्व की 70% पक्षी प्रजातियाँ तेजी से घट रही हैं,
आसमान वही है — पर परिंदे कम हो गए हैं।”

57.
“हर मिनट 27 फुटबॉल मैदान जितना जंगल कटता,
पेड़ गिरते हैं — और बेज़ुबान भी साथ गिर जाते हैं।”

58.
“40,000+ प्रजातियाँ Red List में दर्ज,
धरती रो रही है — पर इंसान सुन नहीं रहा।”

59.
“काला हिरण कभी मैदानों का राजा था,
अब बस कैमरों में कैद — और रिपोर्टों में लुप्तप्राय।”

60.
“21% शिकारी पक्षी जलवायु परिवर्तन से मर रहे,
ऊँचाई वही है — पर हवा ज़हरीली हो चुकी।”

61.
“पेंगुइनों की आधी प्रजातियाँ decline पर हैं,
बर्फ पिघलती गई — और घर उनके बहते गए।”

62.
“कोरल रीफ का 50% मर चुका गर्म समुद्रों में,
रंग चुरा लिए समुद्र ने — और जीवन भी।”

63.
“दुनिया के 52% wetlands गायब,
जहाँ जीवन पलता था — वहाँ अब सूखे की दरारें हैं।”

64.
“1.8 करोड़ जानवर हर रोज़ इंसानी गतिविधियों से मरते,
गिनती खत्म नहीं होती — पर ज़िंदगी खत्म हो जाती है।”

65.
“2050 तक प्लास्टिक मछलियों से अधिक हो जाएगा,
समुद्र बचेगा नहीं — जो बचेंगे वो सिर्फ़ आँकड़े होंगे।”

66.
“गंगा डॉल्फिन सिर्फ़ 3000 बची,
नदी वही है — पर उसका संगीत खो गया।”

67.
“भारत में 50% घासभूमि खत्म,
जहाँ हिरण दौड़ते थे — अब सड़कें दौड़ रही हैं।”

68.
“लाल पांडा 10,000 से भी कम,
पहाड़ ठंडे हैं — पर इंसानों की लालसा गर्म।”

69.
“कई देशों में हाथियों की गिनती आधी,
जंगल बचे नहीं — तो उनकी चाल भी खो गई।”

70.
“14000+ प्रजातियाँ habitat loss में दर्ज,
घर सिर्फ इंसान को चाहिए था — बाकी सब बेघर कर दिए।”

71.
“दरियाई घोड़ा (Hippo) अब ‘अत्यधिक खतरे’ में,
नदियाँ सिकुड़ीं — और जीवन भी।”

72.
“भारत की 26% प्रजातियाँ खतरे में,
अमृतकाल है — मगर प्रकृति घायल।”

73.
“नील व्हेल तेज जहाज़ों की टक्कर से मरती,
समुद्र गहरा है — पर इंसानी शोर और गहरा।”

74.
“ऊन की भेड़ें लाखों मारी गईं फैशन के नाम पर,
कपड़े चमके — और जीवन बुझ गया।”

75.
“कंगारू आबादी 40% घट चुकी,
मैदान वही — पर छलांगें कम।”

76.
“भेड़िये इंसानी डर से खत्म हुए,
खुद डरते थे — पर हम उनका डर बन गए।”

77.
“समुद्री कछुए 90% कम,
किनारे वही — पर अंडे सुरक्षित नहीं।”

78.
“शार्क की 100 मिलियन मौतें हर साल,
समुद्र में राजा वही — पर इंसान शिकारी बड़ा।”

79.
“हिम तेंदुआ 4000 तक सिमट गया,
बर्फ बची — पर उसका अकेलापन बढ़ा।”

80.
“18% घड़ियाल ही जीवित,
नदियाँ सूखी — और आँखें भी।”

81.
“गैंडे की 3 प्रजातियाँ लगभग खत्म,
सींग बचा — पर सांसें चली गईं।”

82.
“स्नो गीज़ की यात्रा 60% घटी,
आसमान बदल गया — पर इंसान नहीं।”

83.
“पार्ट्रिज और क्वेल आबादी 70% कम,
खेती बढ़ी — पर खेतों की आवाजें घट गईं।”

84.
“लायन population 100 साल में 90% घटी,
राजा वही — पर उसका साम्राज्य टूट गया।”

85.
“गोरिल्ला भविष्य में किताबों में होगा,
जंगल सिकुड़ा — और परिवार भी।”

86.
“कछुए के बच्चे 1% ही जीवित रह पाते,
समुद्र विशाल — पर उम्मीद छोटी।”

87.
“ओरंगउटान 50 साल में आधे,
पेड़ कटते रहे — और ममता घटती रही।”

88.
“पेंगोलिन दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी वाला जीव,
खाल चमकी — पर कराहें दब गईं।”

89.
“हंस (Swan) दूषित झीलों में मरते,
पानी साफ नहीं — इसलिए परिंदे भी नहीं।”

90.
“बायसन कभी लाखों थे — अब कुछ हजार,
मैदान वही — पर झुंड टूट गए।”

91.
“25% प्राइमेट्स extinction risk पर,
जिनसे हम जुड़े — वो ही दूर होते गए।”

92.
“समुद्री घोड़े 50% कम,
लहरें वही — पर प्यार नहीं रहा।”

93.
“मोर भी urbanization का शिकार,
नाच तो आज भी है — पर जंगल नहीं।”

94.
“गंगा नदी में 80% प्रदूषण,
नदी पुकारती है — पर इंसान सुनता नहीं।”

95.
“सांवले हिरण अब खतरे में,
खुले मैदानों की जगह — कंक्रीट खड़ा हो गया।”

96.
“टुंड्रा के रेनडियर 40% घटे,
बर्फ गली — और जीवन भी।”

97.
“मैनटी (Sea Cow) boat-collision से मरते,
समुद्र शांत — पर किनारे हिंसक।”

98.
“ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत के 150 से भी कम,
आकाश का राजा — अब आखिरी सांसें गिन रहा।”

लुप्त होते जानवरों का दर्द
लुप्त होते जानवरों का दर्द

99.
“हंपबैक व्हेल 30% घट चुकी,
उसकी आवाजें दूर जाती थीं — अब मुश्किल से लौटती हैं।”

100.
“धरती पर 15,000+ प्रजातियाँ खत्म होने की कतार में,
कुदरत रो रही है — पर इंसान व्यस्त है अपने काम में।”

FAQ

1️⃣ लुप्तप्राय जानवर क्या है? (उदाहरण सहित)
लुप्तप्राय जानवर वे होते हैं जिनकी संख्या इतनी कम हो गई है कि भविष्य में उनके पूरी तरह खत्म (विलुप्त) होने का खतरा हो।

उदाहरण:

बाघ (Tiger)
एशियाई शेर (Asiatic Lion)
गैंडा (Rhinoceros)
विशाल पांडा (Giant Panda)

2️⃣ सबसे ज्यादा दर्द किस जानवर का होता है?
वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो:

स्तनधारी जानवर (Mammals) जैसे
👉 हाथी, कुत्ता, बिल्ली, गाय, घोड़ा
इनका नर्वस सिस्टम इंसानों जैसा होता है, इसलिए ये
👉 शारीरिक और भावनात्मक दोनों दर्द महसूस करते हैं।
➡️ हाथी को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि वह
दुख, शोक और यादें भी रखता है।

3️⃣ किन जानवरों को दर्द नहीं होता?
कुछ जीवों में दर्द महसूस करने की क्षमता बहुत कम या नहीं होती, जैसे:

कीड़े-मकोड़े (Insects)
जेलीफ़िश (Jellyfish)
समुद्री स्पंज (Sea Sponge)
⚠️ कारण: इनके पास विकसित दिमाग और नर्व सिस्टम नहीं होता।

4️⃣ आपको क्यों लगता है कि कुछ जानवर लुप्तप्राय हैं?
जानवरों के लुप्तप्राय होने के मुख्य कारण:

🌳 जंगलों की कटाई
🏭 प्रदूषण
🔫 अवैध शिकार
🌡️ जलवायु परिवर्तन
🏙️ इंसानी विस्तार (शहर, सड़कें)
➡️ इंसान की गतिविधियाँ ही सबसे बड़ा कारण हैं।

5️⃣ 5 विलुप्त जानवरों के नाम (Hindi)
डोडो
डायनासोर
ऊनी मैमथ
क्वाग्गा
तस्मानियन टाइगर

6️⃣ 10 विलुप्त जानवरों के नाम (Hindi)
डोडो
डायनासोर
ऊनी मैमथ
तस्मानियन टाइगर
क्वाग्गा
सेबर-टूथ टाइगर
पैसेंजर पिजन
आयरिश एल्क
स्टेलर सी काउ
ग्रेट ऑक

7️⃣ विलुप्त होने वाले जानवरों के नाम (सामान्य सूची)
डोडो
डायनासोर
ऊनी मैमथ
पैसेंजर पिजन
तस्मानियन टाइगर

8️⃣ 10 विलुप्त जानवरों के नाम (in English)
Dodo
Dinosaur
Woolly Mammoth
Tasmanian Tiger
Passenger Pigeon
Quagga
Saber-toothed Tiger

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