Kashamakash Shaayaree/प्रेम के उतार-चढ़ाव की कहानी-कशमकश वह भावना है, जो दिल के भीतर कभी हलचल पैदा करती है, कभी तन्हाई और कभी उलझन में डाल देती है। प्रेम में उलझे दिल की यह स्थिति न केवल दर्दनाक होती है, बल्कि एक नए एहसास को भी जन्म देती है। ऐसे में, जब किसी को अपने प्यार के बीच खुद से, अपनी धड़कनों से, और अपने ही जज़्बातों से कशमकश होती है, तो यह केवल एक शेर या शायरी के रूप में ही बाहर निकलता है। प्रेम और कशमकश की यह मिलीजुली शायरी लोगों के दिलों को छू जाती है और उनकी मानसिक स्थिति को समझने का एक तरीका बनती है। आइए, हम इस कशमकश को शायरी के माध्यम से महसूस करें
कशमकश शायरी
दिल और दिमाग की कशमकश शायरी
जिंदगी की कशमकश शायरी
कशमकश शायरी

1.
कभी खुद से लड़ते हुए, कभी तुझे पाने की जंग में,
दिल में उलझनें बढ़ती हैं, और दिल की आवाज़ मौन रहती है।
Kabhi khud se ladte hue, kabhi tujhe paane ki jang mein,
Dil mein uljhanen badhti hain, aur dil ki awaaz bhi maun rehti hai.
2.
जब तुझसे दूर होता हूँ, कशमकश और गहरी हो जाती है,
मेरे मन में सवाल उठते हैं, क्या तू भी महसूस करती है?
Jab tujhse door hota hoon, kashmakash gehri ho jaati hai,
Mere mann mein sawaal uthte hain, kya mehsoos karti hai?

Tujhse milkar bhi phir woh doori ka ehsaas rehta hai,
Kabhi apna, kabhi tera pyaar, ye uljhanen chhupa jaata hai.
3.
तुझसे मिलकर भी दूरी का एहसास रहता है,
तेरे प्यार,का नशा पल पल रहता है ।
tujhase milakar bhee dooree ka ehasaas rahata hai,
tere pyaar,ka nasha pal pal rahata hai .
4.
आँखों में तेरे खुद को ढूढ़ते दिल कशमकश में डूब जाता है,
क्या यह प्यार है या फिर एक मासूम सा धोखा,
aankhon mein tere khud ko dhoodhate dil kashamakash mein doob jaata hai,
kya yah pyaar hai ya phir ek maasoom sa dhokha,
5.
तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा लगता है,
फिर भी दिल की उलझनें बढ़ने लगता है
tere bina har lamha adhoora sa lagata hai,
phir bhee dil kee ulajhanen badhane lagata hai
6.
कभी यह लगता है कि तुझे छोड़ दूँ,
कभी लगता है तुझ बिन जीना छोड़ दूँ
kabhee yah lagata hai ki tujhe chhod doon,
kabhee lagata hai tujh bin jeena chhod doon
7.
दिल में छुपी हुई है एक खामोशी,
जिसे कभी कोई समझ नहीं पाया
dil mein chhupee huee hai ek khaamoshee,
jise kabhee koee samajh nahin paaya
8.
प्यार में खोने से पहले, खुद को खोजता हूँ,
कभी मैं तुझसे बहुत दूर, कभी पास भी होता हूँ।
Pyaar mein khoane se pehle, khud ko khoojhta hoon,
Kabhi main tujhse bahut door, kabhi paas bhi hota hoon.
दिल और दिमाग की कशमकश शायरी

9.
दिल कहता है तू पास हो, दिमाग कहता है दूर रह,
इन दोनों के बीच खड़ी मेरी उलझनें बढ़ती जाएं।
10.
दिल का वो डर, दिमाग की वो समझ,
कभी दोनों एक जैसे होते हैं, कभी दोनों जुदा हैं।
Dil ka woh dar, dimaag ki woh samajh,
Kabhi dono ek jaise hote hain, kabhi dono juda rehte hain.
11.
दिल की आवाज़ सुनने का मन करता है,
पर दिमाग कहता है, क्या ये सही रास्ता है?
Dil ki awaaz sunne ka mann karta hai,
Par dimaag kehta hai, kya yeh sahi raasta hai?
12.
दिल कहता है रुक जा, दिमाग कहता है आगे बढ़,
ये कशमकश दिल में एक हलचल सी मचाती है।
Dil kehta hai ruk ja, dimaag kehta hai aage badh,
Yeh kashmakash dil mein ek halchal si machaati hai.
13.
दिमाग की बातों में दिल खो जाता है,
कभी सुकून मिलती है, कभी उलझनें और बढ़ जाती हैं।
Dimaag ki baaton mein dil kho jaata hai,
Kabhi sukoon milti hai, kabhi uljhanen aur badh jaati hain.
14.
दिल की हर बात तर्कों से नहीं समझी जा सकती,
कभी दिमाग की समझ को दिल की ज़रूरत होती है।
Dil ki har baat tarkon se nahi samajhi ja sakti,
Kabhi dimaag ki samajh ko dil ki zarurat hoti hai.
15.
दिल कहता है खुद से प्यार कर, दिमाग कहता है संभल जा,
दोनों के बीच में, फंसा हूं मैं, किसे सही मानूं अब?
Dil kehta hai khud se pyaar kar, dimaag kehta hai sambhal ja,
Dono ke beech mein, fansa hoon main, kise sahi maano ab?
16.
दिल की ख्वाहिशें कह रही हैं, कुछ अलग ही करो,
पर दिमाग की तर्क की आवाज़, कशमकश में है।
Dil ki khwahishein keh rahi hain, kuch alag hi karo,
Par dimaag ki tark ki awaaz, kashmakash mein hai.
17.
कभी दिल कहता है डर मत, कभी दिमाग कहता है होशियार रह,
इन दोनों के बीच में उलझा, मैं किसे सही मानूं अब?
Kabhi dil kehta hai dar mat, kabhi dimaag kehta hai hoshiyar reh,
In dono ke beech mein uljha, main kise sahi maano ab?
18.
दिल और दिमाग की ये जंग खत्म नहीं होती,
कभी दिल हारता है, कभी दिमाग की आवाज़ जीत जाती है।
Dil aur dimaag ki yeh jang khatam nahi hoti,
Kabhi dil haarta hai, kabhi dimaag ki awaaz jeet jaati hai.
19.
दिल चाहता है प्यार, दिमाग चाहता है समझदारी,
फिर भी इन दोनों की चाहत में, एक उलझन बनी रहती है।
Dil chahta hai pyaar, dimaag chahta hai samajhdari,
Phir bhi in dono ki chaahat mein, ek uljhan bani rehti hai.
20.
दिल कहता है तुमसे मिलूं, दिमाग कहता है रुक जा,
इन दोनों के बीच फंसा, मैं कब तक जाऊँगा?
Dil kehta hai tumse miloon, dimaag kehta hai ruk ja,
In dono ke beech fansa, main kab tak jaoonga?
21.
दिल की आवाज़ सच्ची होती है, दिमाग की तर्क झूठी,
फिर भी दोनों के बीच में कशमकश है, जो दिल को डुबो देती है।
Dil ki awaaz sachchi hoti hai, dimaag ki tark jhoothi,
Phir bhi dono ke beech mein kashmakash hai, jo dil ko dubo deti hai.

22.
कभी फैसले सुकून देते हैं, कभी खुद से ही उलझ जाते हैं,
जिंदगी की कशमकश में हम, कभी ठहरते हैं, कभी भाग जाते हैं।
Kabhi faisle sukoon dete hain, kabhi khud se hi uljhatay hain,
Zindagi ki kashmakash mein hum, kabhi thaharte hain, kabhi bhaag jaate hain.
23.
हर रास्ता अजनबी लगता है, कोई सही नहीं लगता,
कभी मंजिल से प्यार हो जाता है, कभी खुद से ही डर लगता है।
Har raasta ajnabi lagta hai, koi sahi nahi lagta,
Kabhi manzil se pyaar ho jaata hai, kabhi khud se hi dar lagta hai.
24.
हमसफ़र तो चाहिए था, पर रास्ता अकेला ही मिला,
जिंदगी की कशमकश में, खुद को खुद से ही भिड़ा लिया।
Humsafar to chahiye tha, par raasta akela hi mila,
Zindagi ki kashmakash mein, khud ko khud se hi bhidha liya.
25.
जिंदगी के सफर में खुद को समझ पाना मुश्किल है,
कभी खुशी, कभी ग़म, यह कशमकश दूर तक चली जाती है।
Zindagi ke safar mein khud ko samajh paana mushkil hai,
Kabhi khushi, kabhi gham, yeh kashmakash door tak chali jaati hai.
26.
कभी खुद से लड़ते हैं, कभी दूसरों से सवाल करते हैं,
जिंदगी की कशमकश में हर एक कदम, हम खुद से पूछते हैं।
Kabhi khud se ladte hain, kabhi doosron se sawaal karte hain,
Zindagi ki kashmakash mein har ek kadam, hum khud se poochhte hain.
27.
कभी दिल कहता है, सब कुछ ठीक है, कभी दिमाग कहता है नहीं,
जिंदगी की कशमकश ने हमें हर पल, खुद से ही दूर किया है।
Kabhi dil kehta hai, sab kuch theek hai, kabhi dimaag kehta hai nahi,
Zindagi ki kashmakash ne humein har pal, khud se hi door kiya hai.
28.
राहों में कांटे हैं, मंजिल का रास्ता भी धुंधला सा है,
जिंदगी की कशमकश में हमें, कभी खुद से ही सवाल होता है।
Raahon mein kaante hain, manzil ka raasta bhi dhundhla sa hai,
Zindagi ki kashmakash mein humein, kabhi khud se hi sawaal hota hai.
29.
कभी लगता है सब खो गया है, फिर भी एक उम्मीद जगती है,
जिंदगी की कशमकश में उम्मीद ही वह रौशनी है, जो कभी बुझती नहीं।
Kabhi lagta hai sab kho gaya hai, phir bhi ek umeed jagti hai,
Zindagi ki kashmakash mein umeed hi woh roshni hai, jo kabhi bujhti nahi.
30.
कभी ख्वाहिशें सामने होती हैं, कभी डर खुद से ही आता है,
जिंदगी की कशमकश में हम, कभी खुद से भी उलझ जाते हैं।
Kabhi khwahishein saamne hoti hain, kabhi dar khud se hi aata hai,
Zindagi ki kashmakash mein hum, kabhi khud se bhi uljhatay hain.
31.
ग़मों से लड़ते हैं, खुशियों से डरते हैं,
जिंदगी की कशमकश में हम, कभी जीते हैं, कभी हारते हैं।
Gamon se ladte hain, khushiyon se darte hain,
Zindagi ki kashmakash mein hum, kabhi jeetay hain, kabhi haarte hain.
32.
हमेशा कुछ न कुछ अधूरा सा लगता है,
जिंदगी की कशमकश में कभी खुद से ही शिकवा होता है।
Hamesha kuch na kuch adhura sa lagta hai,
Zindagi ki kashmakash mein kabhi khud se hi shikva hota hai.
33.
उम्मीदें बहुत थीं, पर रास्ते थम से गए,
जिंदगी की कशमकश में, सब कुछ धुंधला सा हो गया।
Umeedein bahut thi, par raaste tham se gaye,
Zindagi ki kashmakash mein, sab kuch dhundhla sa ho gaya.
34.
कभी सोचते हैं, क्या ये रास्ता सही है?
लेकिन जिंदगी की कशमकश ने हमें यकीन दिलाया है,
35.
कभी खुद से लड़ते हैं, कभी खुद से प्यार करते हैं,
जिंदगी की कशमकश में हम, अपनी पहचान खोने से डरते हैं।
Kabhi khud se ladte hain, kabhi khud se pyaar karte hain,
Zindagi ki kashmakash mein hum, apni pehchaan khone se darte hain.
36.
एक ओर दिल की उम्मीदें हैं, दूसरी ओर दिमाग का डर,
जिंदगी की कशमकश में हम, हमेशा इसी जद्दो-जहद में रहते हैं।
Ek aur dil ki umeedein hain, doosri aur dimaag ka dar,
Zindagi ki kashmakash mein hum, hamesha is jaddo-jahad mein rehte hain.\
FAQ🔥 1. कशमकश शायरी रेख़्ता

38.
दिल एक तरफ खींचे, दिमाग दूसरी राह,
इसी दो राहे में हर शख़्स बिखरता रहा।
37.
कशमकश में भी मुस्कुरा कर जीना पड़ता है,
ज़िंदगी का दर्द दिल में ही पीना पड़ता है।
39.
किसे सच बताऊँ, किससे डर जाऊँ,
कशमकश भरे दौर में खुद को ही समझ न पाऊँ।
40.
कभी खोना अच्छा, कभी पाना जरूरी,
ज़िंदगी की कशमकश ने मुझे बेहद मजबूत कर दी।
41.
सोच बदल दूँ या दिल को मनाऊँ,
हर रोज़ नई कशमकश में खुद को पाऊँ।
42.
दर्द क्या है, ये तो कशमकश ही सिखाती है,
मुस्कुराती आँखों के पीछे की खामोशी बताती है।
43.
मैं भी टूटा हूँ कदम-कदम पर,
ये कशमकश ही है जिसने चलना सिखाया बरसोंभर।
44.
कभी खुशियों की तलाश, कभी ग़मों की चाह,
दिल हर मोड़ पर उलझता रहा बेपनाह।
45.
किसी को खोकर किसी को पाने की चाह में,
ज़िंदगी हर मोड़ पर इम्तिहान लेती है राह में।
46.
अधूरी सी ख्वाहिशें लिए जीते हैं हम,
कशमकश है या ज़िंदगी—समझ नहीं आता सनम।
47.
दिल कहता है रुक जाऊँ, दिमाग कहता है बढ़ जाऊँ,
इसी खींचतान में हर दिन खुद को हारता पाऊँ।
48.
कशमकश ने मुझे कई चेहरे दिखाए,
कुछ अपने लगे, कुछ वक्त के साथ पराए।
49.
कभी सुकून माँगा, कभी दर्द ने पुकारा,
ज़िंदगी की कशमकश ने हमें हर रोज़ उबारा।
50.
मैं किसे बताऊँ क्या हाल-ए-दिल है मेरा,
कशमकश में उलझा हूँ—ये राज़ बहुत गहरा।
51.
कभी खोया, कभी पाया,
ये कशमकश का सफर ही तो मुझे मजबूत बनाया।
52.
दिल की सुनूँ तो बिखर जाऊँ,
दिमाग की सुनूँ तो ठहर जाऊँ।
53.
कशमकश में भी मुस्कान रखना सीख लिया है,
वक्त के साथ खुद को लिखना सीख लिया है।
54.
ज़िंदगी की राहों में उलझनें बहुत हैं,
पर मेरे इरादों की स्याही में कमज़ोरी नहीं।
55.
इक फैसला करूँ तो दूसरा डर सताए,
कशमकश का ये सिलसिला फिर लौट आए।
56.
खुश रहना भी जरूरी था, दर्द सहना भी,
इस कशमकश ने मुझे इंसान बनाया पूरा।
🔥 2. Zindagi ki Kashmakash – Harivansh Rai Bachchan स्टाइल में

57.
ज़िंदगी की राह पर चलते-चलते थक गए हम,
कभी मुस्कान माँगी मिले सिर्फ गम
58.
ज़िंदगी तुझसे शिकवा नहीं,
तेरी कशमकश ने ही हौंसला दिया।
59.
कभी सूखे पत्तों-सा बिखर गया मैं,
कभी पर्वत-सा अडिग होकर खड़ा रहा।
60.
दर्द भी आया, चाहत भी आई,
कशमकश इसी का नाम ज़िंदगी बताई।
61.
जो गिरा, वही तो उभरा,
कशमकश ने हर कदम पर मुझे सुधारा।
62.
थकान ने कहा बैठ जाओ,
हौंसले ने कहा—चलते जाओ।
63.
मन भी टूटा, तन भी टूटा,
पर इरादों ने कभी दम न छोड़ा।
64.
कशमकश ने लकीरों को मोड़ दिया,
जीवन को अपने अंदाज़ में जोड़ दिया।
65.
आँसू बहाने से कुछ न होगा,
चलो मुस्कुराओ, फिर से जीना होगा।
66.
कभी हार मानने का दिल किया,
कभी जीतने का जूनून जगा।
67.
जितनी भी ठोकरें लगीं राहों में,
उतना मज़बूत हुआ हर कदम।
68.
ज़िंदगी से बड़ा कोई पाठशाला नहीं,
और कशमकश से बड़ा कोई गुरु नहीं।
69.
हारा नहीं हूँ, बस थका हूँ थोड़ा,
मगर सफ़र अब भी बाकी है मेरा।
70.
कशमकश ने कहा—रुक जाओ,
क़दमों ने कहा—कभी हार मत मानो।
71.
कल की चिंता में आज मत रोओ,
जीवन एक दीप है—बस धीरे-धीरे जलने दो।
72.
जितनी भी उलझनें आईं,
उतनी ही राहें खुलती चली गईं।
73.
कशमकश में ही इंसान ढलता है,
एक पत्थर भी तराशकर मूरत बनता है।
74.
ज़िंदगी ने हर मोड़ पर परखा है,
पर मैंने कभी खुद को देखा नहीं गिरते।
75.
थोड़ी धूप है, थोड़ी छाँव है,
इसी का नाम तो ज़िंदगी का गाँव है।
⭐ 3. जिंदगी की कशमकश शायरी

76.
ज़िंदगी हर मोड़ पर हमें आज़माती रही,
कभी आँसू, कभी मुस्कान का इम्तिहान लेती रही।
77.
कशमकश में भी जीना सीख लिया हमने,
टूटकर भी मुस्कुराना स्वीकार है हमें।
78.
कभी खुद से लड़ाई, कभी दुनिया से झगड़ा,
यही कशमकश हर दिन थोड़ा-थोड़ा सिखा गई।
79.
सब कुछ पाकर भी खाली-खाली लगता है,
शायद यही जिंदगी की कशमकश का हिस्सा है।
80.
दिल कुछ कहता है, दिमाग कुछ और,
इसी दोराहे पर जिंदगी हर दिन मजबूर।
81.
कभी कदम आगे बढ़ते, कभी पीछे हटते,
कशमकश के ये पल भी जीवन की सीख बनते।
82.
हर मुस्कान के पीछे कोई न कोई दर्द है,
कशमकश ही तो इंसान को मज़बूत करती है।
83.
कभी चाहतों ने उलझाया, कभी हालात ने,
ज़िंदगी ने हमें बस समझाया अपने अंदाज़ से।
84.
हम हर मोड़ पर खुद को नया पाया,
कशमकश ने हमें फिर-फिर तराशा।
85.
भागदौड़ में सब कुछ मिला,
पर सुकून फिर भी अधूरा ही रहा।
86.
कशमकश की धूल में ही चमक मिलती है,
हर दर्द में ही आगे बढ़ने की दमक मिलती है।
87.
कभी हार का डर, कभी जीत की चाह,
इसी कशमकश में गुजरती हर एक राह।
88.
दिल कहता है आगे बढ़,
वक़्त कहता है थोड़ा ठहर।
89.
इंसान तभी बड़ा बनता है,
जब कशमकश से लड़कर खुद को जीतता है।
90.
कभी खुद से खफा, कभी खुद से वफ़ा,
यह जिंदगी की कशमकश का किस्सा।
91.
उलझनों में ही रास्ते निकलते हैं,
कशमकश ही इंसान को आगे बढ़ाती है।
92.
कभी रोना आता है, कभी हँसी रुकती नहीं,
यही कशमकश ही तो जिंदगी है सही।
93.
थोड़ा ग़म, थोड़ा सुकून,
यही जिंदगी का असली जूनून।
94.
कशमकश हर दिन नई कहानी लिखती है,
और हम हर दिन नए किरदार बनते हैं।
95.
थककर भी चलते रहना पड़ता है,
क्योंकि जज़्बा भी तो कुछ चाहता है।
⭐ 4. रेख़्ता उर्दू शायरी

96.
जो दिल से निकले वही फ़साना होता है,
रेख़्ता की हर बहर में दर्द पुराना होता है।
97.
वो मिल जाए तो ताबीरें मिलें,
वरना ख़्वाब भी रेख़्ता में रोते हैं।
98.
इश्क़ की रह पर कदम रखना आसान नहीं,
इस राह में हर दिल दर्द का मेहमान नहीं।
99.
ग़म हो, खुशी हो, मोहब्बत हो या फ़साना,
रेख़्ता हर जज़्बात को सजा देता है सुहाना।
100.
वो जो कह न सके, वही शेर बन गया,
दिल का हर दर्द रेख़्ता में बह गया।
101.
नज़्मों में छुपे जो राज़ हैं,
वो दिल के सबसे पास हैं।
102.
उलझनों में भी इश्क़ को ढूँढ लेता हूँ,
रेख़्ता के सफ़्हों पर खुद को पढ़ लेता हूँ।
103.
ये अशआर दिल से दिल तक जाते हैं,
रेख़्ता में लफ़्ज़ खुद-ब-खुद बह जाते हैं।
104.
वक़्त ने जो खामोशी दी,
रेख़्ता ने उसे आवाज़ दे दी।
105.
सफ़र लंबा हो तो ग़म नहीं,
रेख़्ता साथ हो तो दर्द कम नहीं।
106.
दिल की हर धड़कन एक ग़ज़ल है,
और हर साँस रेख़्ता की नज़्म कहलाती है।
107.
कहने को बहुत कुछ है,
पर रेख़्ता में दो पंक्तियाँ ही काफी हैं।
108.
मोहब्बत की हर रंगत यहाँ मिलती है,
रेख़्ता हर दिल को राहत देती है।
109.
इश्क़ जब लफ़्ज़ों में ढलता है,
रेख़्ता हर शेर को चमक देता है।
110.
जो बात होठों तक न आए,
वो रेख़्ता में शेर बन जाए।
111.
हमने दर्द को भी खूबसूरत लिखा,
रेख़्ता की स्याही में डूबकर लिखा।
112.
सादगी से भरे जो लफ्ज़ हैं,
वही रेख़्ता के असल नक़्श हैं।
113.
रेख़्ता के पन्नों पर आँसू भी मुस्कुराते हैं,
जब इश्क़ के किस्से फिर लौट आते हैं।
114.
फ़िक्रें मिट जाती हैं, जज़्बात जाग जाते हैं,
रेख़्ता के शेर लोगों के दिल लगा जाते हैं।
115.
लफ़्ज़ों में जो नूर है,
वो रेख़्ता की ही हूर है।
⭐ 5. जश्न-ए-रेख़्ता शायरी

116.
जश्न-ए-रेख़्ता है, लफ़्ज़ों का मेला है,
हर शेर में दिल का उजाला है।
117.
यहाँ हर दर्द ग़ज़ल बनकर खिलता है,
जश्न-ए-रेख़्ता में हर लफ़्ज़ सिलसिला बनता है।
118.
दिल की बातें यहाँ खुलकर कही जाती हैं,
जश्न-ए-रेख़्ता में रूहें भी सुनी जाती हैं।
119.
लफ़्ज़ों का समंदर यहाँ बहता है,
हर दिल अपनी दास्तान कहता है।
120.
जश्न-ए-रेख़्ता में हर बात शेर बनती है,
दिल की खामोशी भी यहाँ असर करती है।
121.
उर्दू की खुशबू हर तरफ़ फैलती है,
इस जश्न में मोहब्बत ही मोहब्बत रहती है।
122.
कहनियाँ दिल के कोने से निकलकर,
जश्न-ए-रेख़्ता की रोशनी में दमकती हैं।
123.
अदब भी है, तहज़ीब भी है,
जश्न-ए-रेख़्ता में हर दिल करीब भी है।
124.
यहाँ शेर नहीं, धड़कनें पढ़ी जाती हैं,
जश्न-ए-रेख़्ता में रूहें झूमती जाती हैं।
125.
लफ़्ज़ों की बारिश में भीग जाते हैं दिल,
जश्न-ए-रेख़्ता में हर एहसास मिलता है मिल।
126.
नज़्मों का रंग, ग़ज़लों की छाँव,
जश्न-ए-रेख़्ता है मुहब्बत का गाँव।
127.
यहाँ हर फिक्र पिघल जाती है,
जब एक शेर रूह को छू जाता है।
128.
जश्न-ए-रेख़्ता एक एहसास है,
जो दिल से निकलकर दिल तक जाता है।
129.
कौन कहता है मोहब्बत खत्म हुई,
जश्न-ए-रेख़्ता हर साल उसे जिंदा करता है।
130.
यहाँ लफ़्ज़ों में जान बसती है,
और दिल की दास्ताँ धड़कती है।
131.
जश्न हो या ग़म,
रेख़्ता सबका हमदम।
132.
यहाँ हर शेर खिलता है जैसे गुल,
जश्न-ए-रेख़्ता बनाता है दिल को फुल।
133.
लफ़्ज़ों ने जो जोड़ दिए दिल,
जश्न-ए-रेख़्ता ने किया वो हासिल।
134.
हर कलाकार यहाँ अपना दिल बिखेरता है,
जश्न-ए-रेख़्ता हर एहसास संवारता है।
135.
यहाँ दिल का हर जज़्बा बोलता है,
जश्न-ए-रेख़्ता में हर शेर डोलता है।
⭐ 6. दुविधा पर शायरी

136.
कदम आगे बढ़ाऊँ या ठहर जाऊँ,
यही दुविधा हर रोज़ मुझे सताए।
137.
दिल एक ओर, दिमाग दूसरी राह,
यही दुविधा बनती रही मेरी चाह।
138.
कभी दिल मानता नहीं,
कभी दिमाग समझाता नहीं।
139.
दुविधा के पल बड़े गहरे होते हैं,
इनमें कई फैसले ठहरे होते हैं।
140.
कहाँ जाऊँ, किसे सुनाऊँ,
दुविधा में हर बात आधी लगती है।
141.
चुनाव आसान नहीं होता,
दुविधा हर कदम रोक लेती है।
142.
दिल कहता है जाऊँ,
वक़्त कहता है रुक जाऊँ।
143.
दुविधा ही इंसान को मजबूत करती है,
पर इसमें दिल सबसे ज्यादा डरती है।
144.
कभी चाहत अलग, कभी हालत अलग,
दुविधा में हर कदम बहुत तल्ख़।
145.
सोचता हूँ कर लूँ, फिर डर लगता है,
यही दुविधा हर रात जगाता है।
146.
फैसलों की भी अपनी मजबूरी होती है,
दुविधा में जीना भी एक दूरी होती है।
147.
किसे चुनूँ, किसे छोड़ूँ,
दुविधा में दिल को कैसे मोड़ूँ?
148.
दुविधा का बोझ हल्का नहीं होता,
यह हर कदम पर रुकावट बनता है।
149.
चाहतें बहुत हैं, रास्ते कम,
दुविधा हर दिल का सबसे बड़ा ग़म।
150.
फैसला लेने से पहले ही टूट जाता हूँ,
दुविधा में मैं अक्सर रुक जाता हूँ।
151.
दिल में तूफ़ान, दिमाग में सवाल,
दुविधा का सफ़र बड़ा बेहाल।
152.
कभी हाँ ठीक लगती है, कभी नहीं,
दुविधा ने हमें यहां तक ला दिया।
153.
उलझनों में ही तो फैसले छुपे हैं,
दुविधा में ही कई रास्ते खुले हैं।
154.
कभी सोचा, कभी छोड़ा,
दुविधा ने बहुत कुछ रोका।
155.
सब कुछ साफ दिखता है,
पर दुविधा दिल को अंधा कर देती है।
⭐ 7. आकर्षण पर शायरी

156.
तेरी मुस्कान में ऐसा आकर्षण है,
कि दिल खुद-ब-खुद खिंच जाता है।
157.
नज़र मिल जाए तो दिल झुक जाता है,
तेरे आकर्षण का जादू असर दिखाता है।
158.
तेरे बोलने का अंदाज़ भी कमाल,
आकर्षण ऐसा कि दिल हो जाए बेहाल।
159.
तु पास हो तो दिल धड़कने लगता है,
आकर्षण तेरा जादू चलने लगता है।
160.
तेरी सादगी में भी जादू है,
तुझमें एक अजीब सा आकर्षण क़ायम है।
161.
तेरी खामोशी भी कई राज़ कहती है,
तेरा आकर्षण दिल में जगह बनाती रहती है।
162.
तेरे हावभाव में जादू सा है,
आकर्षण तेरा बेहद खास है।
163.
तेरी आँखें खींचकर ले जाती हैं,
इनमें छुपा आकर्षण दिल को भाता है।
164.
सादगी में भी तेरी चमक है,
आकर्षण में तेरी अलग दमक है।
165.
तेरे आने से महफिल संवर जाती है,
तेरे आकर्षण से धड़कनें बढ़ जाती हैं।
166.
तुझे देखते ही रूह मुस्कुराती है,
तेरे आकर्षण से हवा भी महक जाती है।
167.
तेरे करीब होने का एहसास प्यारा है,
आकर्षण तेरा दिल का सहारा है।
168.
तु शरमाए तो होठ जुड़ जाते हैं,
उस आकर्षण में दिल फिर खो जाता है।
169.
तेरे इशारे भी दिल जीत लेते हैं,
तेरा आकर्षण हमको खींच लेता है।
170.
तेरी मौजूदगी हर पल खास बनाती है,
तेरा आकर्षण दिल को पास लाती है।
171.
तेरे बनाव में नहीं, तेरी अदाओं में charm है,
आकर्षण तेरा हर लम्हा warm है।
172.
एक तेरा ही जिक्र जम्मू सा ठंडा,
और तेरा आकर्षण धूप सा गर्म।
173.
खामोशी में भी जादू छुपा है तेरा,
तेरे आकर्षण ने दिल को अपना बना लिया।
174.
तुझे सोचकर ही मुस्कान आ जाती है,
तेरा आकर्षण हवा में भी महक फैलाती है।
175.
तेरा अंदाज़ ही सबसे अलग है,
तेरा आकर्षण दिल को लगे मधुर संगीत।
⭐ 8. विवाद पर शायरी

176.
विवाद से रिश्ते टूट जाते हैं,
खामोशी में कई राज़ छुप जाते हैं।
177.
हर बात पर बहस जरूरी नहीं,
कुछ रिश्तों में चुप रहना भी लाजिमी।
178.
विवाद दिलों को दूर कर देता है,
अहम दो दिलों के बीच दीवार बनाता है।
179.
कुछ बातें न कहना ही अच्छा,
विवाद हर रिश्ते को लड़खड़ा देता है।
180.
अक्सर विवाद वहीं होता है,
जहाँ मोहब्बत गहरी होती है।
181.
विवाद से तकरार बढ़ती है,
और दूरी दिल में गहराती है।
182.
जब लहजे बदल जाएँ,
विवाद खुद-ब-खुद बढ़ जाए।
183.
थोड़ी सी समझदारी विवाद को मिटा देती है,
वरना बात छोटी हो या बड़ी—दिल को चीर देती है।
184.
विवाद ने कई दिलों को रुलाया है,
और कई घरों को वीरान बनाया है।
185.
लहजे में नरमी रखो,
विवाद अपनी अहमियत खो देगा।
186.
हर सच बोलना जरूरी नहीं,
विवाद कई रिश्तों की जड़ कमजोर कर देता है।
187.
अगर प्यार है तो विवाद कम होगा,
अगर अहंकार है तो हर बात ग़म होगा।
188.
थोड़ी चुप, थोड़ी समझदारी,
विवाद को रोक सकती है सारी।
189.
विवाद में बोले गए लफ्ज़ लौटकर नहीं आते,
पर दिल पर लगे निशान हमेशा रह जाते हैं।
190.
कभी-कभी सुलह ही सबसे बड़ी जीत है,
विवाद सिर्फ दिलों में दूरी बढ़ाता है।
191.
विवाद की आग लगी तो घर भी जले,
और दिल भी सुलगते चले गए।
192.
जो सुन ले बिना झगड़े, वही अपना है,
विवाद में बोलना आसान, समझना कठिन है।
193.
विवाद हर कमजोर दिल को तोड़ देता है,
और मजबूत रिश्तों को हिला देता है।
194.
थोड़ा झुकना सीख लो,
विवाद अपनी जगह खुद छोड़ देगा।
195.
विवाद में जीते तो क्या जीते,
हारकर भी रिश्ते बचाना ज्यादा बड़ा है।