Rashtriya Pradushan Niyantran Diwas par jagrukta quotes |ज़हर बनती सांसें, हमारा आज…

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Rashtriya Pradushan Niyantran Diwas par jagrukta quotes |ज़हर बनती सांसें, हमारा आज…-राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस (2 दिसंबर) सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं—यह कड़वी सच्चाई का आइना है।
हमारी हवा जहरीली हो चुकी है, नदियाँ दम तोड़ रही हैं, ज़मीन पर रासायनिक घाव बढ़ रहे हैं और शोर में हमारी अपनी सोच भी दब चुकी है।आज का प्रदूषण कोई “समस्या” नहीं—यह धीमी मौत है।हवा में ज़हर घुल चुका है, बच्चे अस्थमा के साथ बड़े हो रहे हैं, नदियाँ काले पानी का बोझ ढो रही हैं और शहर धुएँ की चादर में लिपटे हैं।

2 दिसंबर—भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाता है कि
एक लापरवाही लाखों जिंदगियाँ तबाह कर सकती है।
और आज, वही लापरवाही पूरे ग्रह को निगल रही है।

यह पोस्ट सिर्फ जानकारी नहीं है—यह एक अलार्म है।
एक पुकार—कि अब भी समय है।
सांसों को बचाना है, नदियों को जगाना है, धरती को फिर हरा बनाना है।

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस: ज़हरीली हवा, मरती नदियाँ और मौन होती प्रकृति

आज प्रदूषण किस स्तर पर पहुँच चुका है (भयावह सच्चाई)
🌫 वायु प्रदूषण (Air Pollution)
भारत में हवा में मौजूद PM2.5 का स्तर WHO मानक से 10 गुना अधिक है।
2023–24 की रिपोर्ट में दिल्ली सहित 14 भारतीय शहर “विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों” में शामिल।
वायु प्रदूषण भारत में हर साल 20–22 लाख मौतों की वजह बन रहा है।
90% भारतीय शहर WHO की “सेफ एयर क्वालिटी” लिस्ट में शामिल नहीं हैं।
🌊 जल प्रदूषण (Water Pollution)
भारत की 70% नदियाँ पीने योग्य नहीं रह गई हैं।
गंगा व यमुना के कई हिस्सों में BOD (Biological Oxygen Demand) खतरनाक स्तर पर है।
76% ग्रामीण भारत को साफ पानी उपलब्ध नहीं है।
🔊 ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
मुंबई, दिल्ली और कोलकाता दुनिया के शीर्ष 10 शोर-प्रदूषित शहरों में।
लगातार 70 डेसिबल के ऊपर शोर मानसिक तनाव, दिल की बीमारी और नींद विकार बढ़ा रहा है।
🌍 पर्यावरण प्रदूषण का कुल प्रभाव
WHO: पृथ्वी पर हर 9 में से 1 मौत प्रदूषण की वजह से।
UN: धरती हर साल लगभग 8 मिलियन टन प्लास्टिक निगल रही है।
प्रदूषण पृथ्वी की जैव विविधता को तेज़ी से नष्ट कर रहा है—लगभग 10,000+ जीव प्रजातियाँ जोखिम में हैं।

प्रदूषण क्यों नहीं रुक रहा? (सच कड़वा है)
इंसान के लालच ने पृथ्वी को बोझ से दबा दिया है।
पेड़ कट रहे हैं, लेकिन कंक्रीट बढ़ता जा रहा है।
फैक्टरियों का कचरा नदियों में बहाया जा रहा है।
मोटर वाहन की संख्या रोज़ बढ़ रही है, हवा इससे भारी हो रही है।
प्लास्टिक इंसान का “सबसे बड़ा दुश्मन” बन चुका है, पर हम इसे छोड़ नहीं रहे।

भोपाल गैस त्रासदी और इस दिन का अर्थ
2–3 दिसंबर 1984 की रात…
ज़हर ने नींद में शहर को निगल लिया।
मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस से 3,800+ मौतें उसी रात और 15,000+ मौतें आगे के वर्षों में।
लाखों लोग आज भी बीमार हैं।

यह दिवस चेतावनी है—
एक गलती, एक चूक और लाखों जिंदगियाँ खत्म।
आज का प्रदूषण भी वैसा ही “धीमी गति का नरसंहार” है।

 “प्रकृति से बेरुख़ी और बढ़ती जनसंख्या: भारत की धरती पर बढ़ता विनाश”
भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ प्रकृति के प्रति हमारी अनदेखी और तेजी से बढ़ती जनसंख्या मिलकर पृथ्वी को ऐसे नुकसान पहुँचा रही है, जिसका बोझ आने वाली पीढ़ियाँ उठाएँगी। शहर फैल रहे हैं, पेड़ कट रहे हैं, नदियाँ कूड़े से भर रही हैं, और हवा जहरीली होती जा रही है।

हम सब रोज़ शिकायत करते हैं—हवा गंदी है, पानी खराब है, गर्मी बढ़ रही है—लेकिन हम भूल जाते हैं कि इन समस्याओं की सबसे बड़ी जड़ हमारी बेपरवाही है।

कैसे बढ़ती जनसंख्या भारत की धरती पर सबसे बड़ा दबाव बना रही है?
अधिक लोग मतलब अधिक घर, अधिक वाहन, अधिक कचरा, और अधिक संसाधनों की खपत।
जंगल तेजी से घट रहे हैं क्योंकि बसाहट के लिए भूमि चाहिए।
खेती का दबाव बढ़ रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है।
नदियाँ रोज़ करोड़ों टन प्रदूषण झेल रही हैं।
आज भारत का हर बड़ा शहर प्रदूषण से जूझ रहा है—दिल्ली इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

प्रकृति से दूरी, विकास का भ्रम
हम विकास को केवल सड़कों, इमारतों और उद्योगों में देखने लगे हैं।
लेकिन असली विकास वह है जिसमें मनुष्य और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें।

आज हम मोबाइल बदलने में एक सेकंड नहीं लगाते, लेकिन पेड़ लगाने में पूरा साल सोचते हैं।
हम सुविधाओं के पीछे भागते जा रहे हैं और उसी प्रकृति को नजरअंदाज कर रहे हैं जो हमें जीवन देती है—हवा, पानी, भोजन।

असली संकट क्या है?
लोग यह मानने को तैयार ही नहीं कि जनसंख्या नियंत्रण एक जरूरत है, विकल्प नहीं।
पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले कामों पर लगाम लगाने की इच्छा कम है।
नीति बने तो जाती हैं, पर लोग पालन कम करते हैं।
शहरों में धुआँ, गाँवों में कचरा… हर जगह प्रकृति बोझ महसूस कर रही है।

आज भारत को सबसे ज़्यादा किस बात को समझने की जरूरत है?
अगर जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही,
अगर हम प्रकृति को इसी तरह नजरअंदाज करते रहे,
अगर कचरा, धुआँ और शोर को “साधारण” मानते रहे,
तो आने वाले 10–20 सालों में हम एक ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर होंगे जहाँ साफ हवा और साफ पानी सिर्फ सपने होंगे।

 प्रदूषण जागरूकता कोट्स

 प्रदूषण जागरूकता कोट्स
 प्रदूषण जागरूकता कोट्स


21.
धुआँ बढ़ रहा है, अब हवा भी रोने लगी,
प्रदूषण की मार से धरती साँसें खोने लगी।

22.
ज़हरीली हवाओं ने शहर को अपनी पकड़ में लिया,
सांसें भी अब जैसे बोझ लेकर चलती हैं।

23.
पेड़ों के कटने से छाँव भी बेजान हो गई,
धरती पर इंसान की हरकतें इंसानियत से अनजान हो गई।

24.
हवा में घुला ज़हर अब बच्चों तक पहुँच रहा है,
ये खेल नहीं, जीवन का सवाल बनता जा रहा है।

25.
हर रोज़ बढ़ता धुआँ हमारी गलती बताता है,
धरती का भविष्य अब हमसे सवाल पूछता जाता है।

26.
प्रदूषण की मार से बदल रहा मौसम का हाल,
इंसान की लापरवाही बन रही है सबसे बड़ा जंजाल।

27.
जहाँ कभी फूलों की खुशबू फैला करती थी,
आज वहाँ धुएँ की चादर बिछा करती है।

28.
पल-पल जहरीली होती हवा हमें चेतावनी दे रही है,
“समय रहते संभल जाओ”—प्रकृति यही कह रही है।

29.
नदी का पानी अब आईना नहीं रहा,
गंदगी ने उसका चेहरा तक बदल दिया।

30.
सड़कें शोर से कांपती हैं दिन-रात,
ध्वनि प्रदूषण ने छीन ली है हमारी सौगात।

31.
धुएँ की गिरफ्त में जब सूरज भी ढक जाता है,
तब समझ लो कि प्रदूषण किस हद तक पहुँच जाता है।

32.
हवा में उड़ती धूल अब सांसों पर वार करती है,
इंसान की लापरवाही धरती को बीमार करती है।

33.
रूठी हुई हवा भी कभी हमारा साथ देती थी,
आज हमारी गलतियों से वो भी नाराज़ रहती है।

34.
ज़मीन रोती है जंगलों की कमी में,
हम खोते हैं सुकून प्रदूषण की जमीं में।

35.
कचरे की जलन में पूरा आसमान जलता है,
प्रकृति की गोद भी अब दर्द से पिघलता है।

36.
हर सांस आज भारी लगती है,
प्रदूषण की कीमत बहुत सारी लगती है।

37.
जहाँ पेड़ उगते थे, अब कंक्रीट की भीड़ है,
इंसान की दौड़ में प्रकृति सबसे पीछे खड़ी है।

38.
धुआँ चढ़ता है आसमान तक हर शाम,
कुदरत पूछती है—कब थमेगा इंसान का ये जाम?

39.
गाड़ियों का शोर अब दिल की शांति छीनता है,
ध्वनि प्रदूषण हमें भीतर से भी भींचता है।

40.
पानी का रंग बदल चुका है यार,
अब भी न जागे तो होगा बहुत बड़ा नुकसान अपार।

41.
मशीनों की गूँज में प्रकृति की आवाज़ खो गई,
इंसान की प्रगति में धरती की हारी हो गई।

42.
हवा का दुर्भाग्य है कि उसे हम रोज़ गंदा करते हैं,
फिर भी वही हमें सांसें देकर जिंदा रखती है।

43.
जहाँ कभी नदियाँ गीत गाती थीं,
आज वहाँ ज़हरीली लहरें बह जाती हैं।

44.
हमारी छोटी गलतियाँ बहुत बड़ा तूफ़ान बनती हैं,
प्रदूषण के रूप में हर पीढ़ी तक चलती हैं।

45.
आकाश धुंध से भर जाता है अब हर त्योहार में,
हम भूल जाते हैं प्रकृति का दर्द अपने शोर-शराबे के वार में।

46.
इंसान की बढ़ती ज़रूरतें प्रकृति पर भारी पड़ने लगीं,
धरती माँ भी अब थककर बीमारी पकड़ने लगी।

47.
पेड़ों की कमी ने हवा को कमज़ोर बना दिया,
सबकुछ जानते हुए भी इंसान ने नसीब को दोष दे दिया।

48.
प्लास्टिक के जाल में नदियाँ क़ैद हो गईं,
कभी जो बहती थीं आज सुबकने पर मजबूर हो गईं।

49.
हर सांस में मिला धुआँ हमें याद दिलाता है,
कि प्रकृति को चोट इंसान खुद पहुँचाता है।

50.
समंदर भी अब कचरे का बोझ ढोते ढोते थक गया,
इंसान के लालच का हिसाब धरती से कोई न रख सका।

51.
शहर की हवा में घुला ज़हर धीरे-धीरे मारता है,
पर इंसान फिर भी इसे सामान्य मानकर चलता है।

52.
हमारी हर सुविधा प्रकृति पर चोट बन जाती है,
दुनिया चलती है पर धरती अंदर से टूट जाती है।

53.
धुआँ देखकर बच्चों की आंखें नम हो जाती हैं,
वो पूछते हैं—“क्या ये हवा हमारी नहीं होती क्या?”

54.
गाँवों की ताज़गी शहरों की लापरवाही में खो गई,
प्रदूषण की लहर हर ओर धीरे-धीरे फैल गई।

55.
रात की हवा भी भारी लगती है अब,
सुकून के पल भी बीमारी लगते हैं अब।

56.
धरती ने जितना दिया वो सब हमने खो दिया,
प्रदूषण ने जीवन का रंग ही बदल दिया।

57.
शोर बढ़ा तो मन की शांति खो गई,
ध्वनि प्रदूषण ने हर खुशी डूबो दी।

58.
हवा अब सवाल पूछती है हर सांस पर,
क्या इंसान सुधरेगा कभी अपनी आस पर?

59.
प्रदूषण का जहर अदृश्य होता है मगर असर गहरा होता है,
धीरे-धीरे सबकुछ खत्म कर देता है।

60.
आज नहीं सुधरे तो कल पछतावा ही मिलेगा,
प्रदूषण इंसान के भविष्य को भी निगलेगा।

61.
हवा में उड़ता हर कण एक चेतावनी है,
हमारी गलती का बोझ प्रकृति पर भारी है।

62.
पेड़ों को काटने की सजा अब मौसम दे रहा है,
गर्मी का कहर हर दिल जला रहा है।

63.
सड़कें धुएँ की रफ़्तार से डरती हैं,
प्रकृति की सांसें कम होती जाती हैं।

64.
इंसान आगे बढ़ता गया पर धरती पीछे छूट गई,
प्रदूषण की परत हर ओर जमती गई।

65.
हर शहर एक गैस चेंबर जैसा लगता है,
जीना भी जैसे अब संघर्ष बनता है।

66.
नदियाँ साफ़ थीं कभी, आज ज़हर का घर हो गईं,
हमारी गलतियों की गवाही दे गईं।

67.
धुआँ इतना बढ़ा कि आसमान काला हो गया,
सूरज भी शर्माकर धुंध में खो गया।

68.
आज नहीं जगेंगे तो कल सांसें जवाब दे जाएंगी,
धरती की पुकार अब चुप न कराई जाएगी।

69.
प्रदूषण की कहानी हर हवा बयां करती है,
दिल दुखता है जब धरती की हालत पढ़ती है।

70.
सांसें बोझिल हैं, हवा उदास है,
प्रदूषण से रोता हुआ हर एहसास है।

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस स्लोगन

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस स्लोगन )
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस स्लोगन )


71.
सांसें बचाना है तो प्रदूषण घटाना होगा,
धरती की हर धड़कन अब हमें जगाना होगा।

72.
पेड़ लगाओ, हवा साफ़ करो,
भविष्य की हर पीढ़ी को सुरक्षित करो।

73.
धुआँ कम करो, नदियों को बचाओ,
प्रकृति का हर दर्द अब महसूस करो।

74.
शहरों का शोर घटाओ, मन का शांति बढ़ाओ,
प्रदूषण की चादर को पीछे हटाओ।

75.
जल, हवा, ध्वनि—तीनों का सम्मान करो,
प्रदूषण की लड़ाई में हर कदम बढ़ाओ।

76.
धरती माँ के लिए छोटा कदम बड़ा होता है,
हर पेड़ और नदी की सुरक्षा जरूरी होता है।

77.
साफ़ हवा, साफ़ पानी, हर जगह हरियाली,
प्रदूषण पर काबू पाए बिना न होगी खुशहाली।

78.
गाड़ियों का कम उपयोग करो, धुएँ को रोको,
प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन को जोड़ो।

79.
ध्वनि प्रदूषण घटाओ, ध्यान से सुनो,
धरती की पुकार अब तुम्हारे कानों तक आए।

80.
जल को गंदा मत करो, नदियों को बचाओ,
प्रकृति के लिए हर दिन कदम बढ़ाओ।

81.
प्रदूषण को रोको, सांसों को बचाओ,
धरती की मुस्कान फिर लौटाओ।

82.
वृक्ष लगाओ, प्लास्टिक कम करो,
प्रकृति का दर्द अब खुद से जोड़ो।

83.
हर कदम सोच-समझकर बढ़ाओ,
प्रदूषण की लड़ाई में हर आवाज़ सुनाओ।

84.
शोर को कम करो, शांति को बढ़ाओ,
प्रकृति की पुकार को महसूस कराओ।

85.
धुएँ की चादर हटाओ, सूरज को फिर चमकाओ,
प्रदूषण के जाल से धरती को बचाओ।

86.
पानी की हर बूंद बचाओ, जीवन को संजोओ,
प्रकृति के नियमों का सम्मान करो।

87.
सड़क पर धुआँ कम करो, पेड़ों को बढ़ाओ,
प्रदूषण को मात देकर भविष्य बनाओ।

88.
नदियों की सफ़ाई करो, समुद्र को बचाओ,
धरती की हर सांस को सुरक्षित बनाओ।

89.
आसमान को साफ़ रखो, जीवन को सुरक्षित बनाओ,
प्रदूषण के ज़हर से खुद को बचाओ।

90.
प्रकृति का सम्मान करो, जीवन को बचाओ,
प्रदूषण पर काबू पाकर सबको खुशहाल बनाओ।

91.
ध्वनि का शोर घटाओ, मन का बोझ हटाओ,
प्रदूषण से लड़कर धरती को बचाओ।

92.
हर पेड़ और नदी को सुरक्षित रखो,
प्रकृति के लिए अपने कदम बढ़ाओ।

93.
साफ़ हवा हर जगह हो, जीवन में खुशियाँ आएँ,
प्रदूषण से बचने का संदेश हर दिल में समाए।

94.
प्लास्टिक घटाओ, ऊर्जा बचाओ,
प्रकृति का दर्द अब खुद से दिखाओ।

95.
प्रदूषण पर काबू पाओ, धरती को हरा बनाओ,
हर सांस में जीवन का आनंद लौटाओ।

96.
जल, हवा और मिट्टी को सुरक्षित रखो,
प्रदूषण कम करके जीवन को संजोओ।

97.
धरती माँ की रक्षा करो, प्रकृति का मान बढ़ाओ,
प्रदूषण घटाकर सबका जीवन बचाओ।

98.
हर शहर हर गाँव में साफ़ हवा बहाओ,
प्रदूषण के जहर से बच्चों को बचाओ।

99.
पेड़ लगाओ, नदियाँ बचाओ,
प्रकृति के साथ मिलकर हर दिन जागरूक बनाओ।

100.
प्रदूषण घटाओ, जीवन बचाओ,
धरती की मुस्कान फिर लौटाओ।

FAQ-भारत में वायु प्रदूषण में नंबर 1 पर कौन सा शहर है?

रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली भारत में सबसे अधिक वायु प्रदूषण वाले शहरों में अक्सर पहले (नंबर 1) स्थान पर आती है। (Jagranjosh.com)
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्ट और निगरानी एजेंसियों में रैंकिंग थोड़ी अलग हो सकती है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण दिवस कब मनाया जाता है?

भारत में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस (National Pollution Control Day) हर साल 2 दिसंबर को मनाया जाता है। (NDTV)
विश्व प्रदूषण दिवस (World Pollution Day) किस तारीख को है?

“World Pollution Prevention Day” को कई स्रोतों में 2 दिसंबर को मनाया जाता है। (National Today)
ध्यान दें कि “प्रदूषण दिवस” के अलग‑अलग प्रकार हो सकते हैं (जैसे वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण), इसलिए तारीख थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन Prevention Day के लिए 2 दिसंबर ही प्रमुखता से माना जाता है।
प्रदूषण की राजधानी क्या है?

अक्सर यह कथन “दिल्ली प्रदूषण की राजधानी है” कहा जाता है, क्योंकि नई दिल्ली गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या से जूझती है और वह AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में बहुत ऊपर रहती है। (Jagranjosh.com)
लेकिन “प्रदूषण की राजधानी” एक औपचारिक पद नहीं है — यह एक रूपक है जो दिल्ली की प्रदूषण स्थिति को दर्शाता है।
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस 2024 की थीम क्या है?

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस 2024 की थीम है: “Clean Air, Green Earth: A Step Towards Sustainable Living”। (TNPSC Thervupettagam)
प्रदूषण नियंत्रण दिवस (Pradushan Niyantran Divas) कब मनाया जाता है?

जैसा कि ऊपर बताया गया है, 2 दिसंबर को (राष्ट्रीय स्तर पर) प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है। (Easy Hindi)
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस कब मनाया जाता है?

वही — हर साल 2 दिसंबर। (HindiKiDuniyacom)
World Pollution Day (विश्व प्रदूषण दिवस) कब मनाया जाता है?

जैसा कि पहले कहा गया — लगभग 2 दिसंबर को “World Pollution Prevention Day” के रूप में कुछ स्रोतों में मनाया जाता है। (National Today)
(Paryavaran Divas) कब मनाया जाता है?

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) हर साल 5 जून को मनाया जाता है। (Wikipedia)
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस 2022 की थीम क्या थी?
पृथ्वी दिवस (Prithvi Divas) कब मनाया जाता है?

आमतौर पर “पृथ्वी दिवस” (Earth Day) हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है (यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण दिवस है)। (AP News)

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युद्ध के दुष्परिणाम पर

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