Poetry In Hindi|हिंदी में कविता|

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Poetry In Hindi|हिंदी में कविता|-प्रकृति का सौंदर्य हमारे जीवन का आधार है, और हम इसी से जुड़े हुए हैं। पेड़-पौधों से हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन मिलती है, नदियाँ हमें जल प्रदान करती हैं, और मिट्टी हमें अन्न देती है। इन सबके बिना मानव का जीवन असंभव है। परंतु, हम भूल रहे हैं कि इस प्रकृति पर ही हमारी हर साँस निर्भर है। आज के समय में जब हम विकास की होड़ में लगे हैं, हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारे जीवन की नींव और हमारी असली पहचान इसी प्रकृति के साथ है।Poetry –प्रकृति का सौंदर्य अपने आप में एक अमूल्य खजाना है, जिसकी हर शय में जीवन की अनोखी गूंज और एक अद्वितीय सुकून भरा स्पर्श है। पेड़-पौधे, नदियाँ, पर्वत,और पशु-पक्षी सभी मिलकर धरती पर जीवन का संतुलन बनाए रखते हैं। मानव इसी सौंदर्य और प्रकृति के संसाधनों पर निर्भर रहकर पनपा है, और उसी से उसने अपनी सभ्यता और जीवन की नींव रखी है।

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प्रकृति का सौंदर्य

प्रकृति का सौंदर्य
प्रकृति का सौंदर्य

कविता
ये जंगल, ये नदियाँ, ये पर्वत विशाल,
प्रकृति का श्रृंगार हैं, अमिट और निहाल।
फूलों की खुशबू, पत्तों की सरसराहट,
हर कोने में बसी है उसकी अनोखी ताकत।
सूरज की किरणें, सुबह की नमी,
धरती को चूमे, हर एक कली।
बिन प्रकृति के क्या है जीवन का आधार,
उसी के दम पर हैं हम सब, यही है सार।
हरियाली की चादर ओढ़े, ये धरती मुस्कुराती है,
पशु-पक्षी, जीव-जंतु, सबको सहारा देती है।
हर बूँद में जीवन का रस है बहता,
इस प्रकृति से ही मानव है बंधा, ये रिश्ता सच्चा।
पर्वतों की ऊँचाई में है अद्भुत सृजन,
नदियों की गहराई में छिपा है जीवन।
हवाओं की सरगम, ये झरनों की गूँज,
हैं सब हमें जीवन का एहसास देती, हर रोज़।
चाँदनी रात में झील का वो ठहराव,
ओस की बूंदों में सुबह का अलाव।
हर दृश्य में बसी है एक मधुरता की छवि,
ये प्रकृति ही है, जिसने हमें दी हर खुशी।
मिट्टी की महक में बसी है सादगी,
उसकी हर कण में है रच-बसने की ताजगी।
आकाश का विस्तार, तारे, ग्रह, सितारे,
सब मिलकर जीवन की नींव को सँवारे।
वृक्षों की शाखाओं में लिपटी छाँव,
उसी में सजीवता का आधार छिपा है हर गाँव।
फल, फूल, पत्ते, हर सांस में साँस है,
प्रकृति से जुड़ा है हर इंसान का आभास है।
वर्षा की बूंदें, धरती का आलिंगन,
नदियाँ जब बहतीं, तो थम जाती है हर धड़कन।
हर कण में है एक रहस्य, एक राग,
बिना प्रकृति के, सूना है जीवन का ये सुहाग।
आकाश में उड़ते वो पक्षी बेफिक्री से,
हमें भी सीख देते हैं प्राकृतिक संजीदगी से।
बिना जंगल, बिन जल, बिन हरियाली की छांव,
क्या मानव जीवन की होगी पूरी यात्रा तमाम?
इस प्रकृति के बिना मानव अधूरा है,
उसके बिना उसका अस्तित्व ही अधूरा है।
चाहे विज्ञान का हो कितना भी कमाल,
प्रकृति ही है जीवन का असली उबाल।

“धरती रही पुकार”

"धरती रही पुकार"
“धरती रही पुकार”

जंगलों की छांव को काट दिया इंसान ने,
बढ़ती चाहतों ने छीन ली धरती की जान रे।
हरियाली की चादर जो फैली थी यहां,
आज धूल-धुएं में गुम है उसकी पहचान रे।
आकाश भी झुका है इस बोझ से भारी,
नदियां रो रही हैं सूनी लहरों की सवारी।
पेड़, जो कभी छांव और सांसों का सहारा थे,
अब बेजान खड़े हैं, टूटे दिल के किनारे पे।
बढ़ती आबादी और बढ़ते स्वार्थ की आग,
धरती से मिटते जा रहे हैं जीवन के राग।
जंगल, जो हमारे प्राणों की डोर हैं,
काट रहे हैं उन्हें, बस चंद सिक्कों के जोर पर।
हर जीव का हक था इस धरती की बगिया में,
पर इंसान ने उसे मिटा दिया अपनी ख्वाहिश की दुनियां में।
क्या ये वही धरती है, जो जीवन का आधार थी,
अब तो हर कोने में बस शोर और आहें बरकरार हैं।
वो चिड़ियों का चहचहाना, वो हरियाली का गीत,
सब खो गया है, सन्नाटों में बस दर्द की रीत।
कंक्रीट के जंगलों ने सांसों को घेर लिया है,
प्रकृति की छांव को हमने खुद ही सहेज लिया है।
इंसान की ये भूख कभी थम ना पाई,
हर एक सुंदरता को उसने धुएं में मिलाई।
पर याद रहे, ये कर्ज चुकाना होगा,
प्रकृति का हिसाब आखिर लौटाना होगा।
तो क्यों न थामें हाथ, इस धरती का संवार करें,
हरियाली की चादर फिर से बिछा, नया संसार करें।
जंगलों का हक लौटाएं, नदियों का स्वाभाव दें,
हर जीव को उसका घर, उसकी पहचान दें।
ये धरती जो हमारी मां है, उसे संजोए रखना,
पेड़ों की शाखों में फिर से जीवन का नशा भरना।
कभी थे हम भी उसके अंग, उसकी धड़कन के साथ,
आज फिर लौट आएं उस पथ पर, छोड़ दे अपनी गलत बात।
धरती का ये पुकार है, उसे हमें बचाना है,
इस हरी बगिया में फिर से हरियाली सजाना है।
आओ हम सब मिलकर कसम खाएं साथ,
कि प्रकृति की हर श्वास को बनाएंगे अपने विश्वास का पाथ।

धरती की करुण पुकार सुनो

धरती की करुण पुकार सुनो
धरती की करुण पुकार सुनो


धरती का आँचल आज आंसुओं से भीगा है,
हर कोने में उसका दर्द गूंजा और सिसका है।
वो जंगल, जो कल तक हरियाली से भरे थे,
आज उनके दिलों में वीरानी के धागे जुड़े हैं।
कभी वृक्षों की छांव थी, जो हमें शीतल हवा देती,
आज वही वृक्ष कटकर बस लकड़ी का ढेर बनते।
क्यों हम भूल गए उसकी छांव का अहसान?
क्यों हम उसकी सिसकियों से यूँ अंजान?
नदियों का गीत भी अब गुमसुम सा है,
कल-कल करती धारा अब मंद हो गई है।
वो जल की लहरें, जो जीवन का स्रोत थीं,
आज उनमें जहर है, कोई जीवन नहीं है।
हर कदम पर हमने केवल खुद को संवारा,
प्रकृति का दर्द सहना नहीं, बस खुद का सहारा।
धरती के संसाधनों पर जैसे हक जमाया,
उसकी हरीतिमा को खुद की जरूरत में लुटाया।
कभी सोचा नहीं, कि ये पृथ्वी केवल हमारी नहीं,
प्रत्येक जीव का है इसमें हिस्सा, कोई पराया नहीं।
क्यों हमने उसकी गोद से हर बूँद चुरा ली,
उसकी मिट्टी की सुगंध में भी अब विष मिला दी।
धरती की छाती को हमने यूं ही छेदा,
खनिज और तेल का नशा हमें किस हद तक ले गया।
कभी सोचा न हमने उसके आँसुओं का मोल,
बस अपने स्वार्थ में डाल दिया हर चीज का तोल।
वो हवा जो जीवन की आस थी,
आज धुएं और जहर की तलाश में फंसी है।
आसमान का नीला आंचल अब मटमैला हो चला,
सूरज की किरणें भी अब उसमें घुटन महसूस कर रहीं।
बढ़ते शहरों के शोर में खो गई वो शांति,
प्रकृति की ममता भी अब धुंधली हो चली।
कंक्रीट के जंगल हर ओर उगे,
धरती की हरितिमा को हमसे दूर कर गए।
पक्षियों का चहकना अब जैसे भूल से लुप्त हो गया,
प्रकृति के संगीत का वो मधुर गान खो गया।
हर सुबह अब सन्नाटे की आगोश में छिप गई है,
धरती का हर कोना बस आँसू पी रहा है।
आओ मिलकर एक वादा करें,
धरती के आँगन को फिर से हरा बनाएं।
वृक्षों की हर शाख को फिर से संवारें,
हर कोने में हरियाली की छाया लहराएं।
क्यों न हम पेड़ों को अपना साथी बनाएं,
उनकी जड़ों से फिर से प्रेम का रिश्ता बनाएँ।
हर बीज जो हम बोएंगे, एक जीवन का अमृत बनेगा,
और उस बीज से उगता वृक्ष धरती को संभालेगा।
नदियों की लहरों को फिर से शुद्ध करें,
उनके पानी में प्रेम का रंग भरें।
हर बूँद में वो मिठास लौटाएं,
जिससे हर प्राणी को प्यास बुझाएं।
धरती की इस पुकार को अब हम अनसुना न करेंगे,
हर कदम पर उसके दर्द को अपना कहेंगे।
यह जीवन जो उसने दिया है हमें,
उसे लौटाने का अब हमें प्रण लेना है।
धरती का आँचल हरियाली से लहराए,
हर नदी की लहरें जीवन का गीत गुनगुनाए।
हमारे संकल्प से प्रकृति का हर कोना मुस्कुराए,
हर जीव का हक फिर से उसे दिलाए।
हमने जो खोया, वो अब न दोहराएंगे,
नई पीढ़ी को एक हरा-भरा संसार लौटाएंगे।
प्रकृति का सम्मान, उसकी गोद में संतुलन बनाएंगे,
ताकि हर जीवन यहां, सदा सुरक्षित रह पाएगा।
हम समझेंगे कि यह धरती सिर्फ हमारी नहीं,
हर प्राणी का इसमें है योगदान और भूमिका कहीं।
हमारा कर्तव्य है इसे संजोना और संवारना,
धरती का दर्द हर पल हमसे पुकारना।
“प्रकृति के संग एक नयी शुरुआत”
आओ मिलकर एक नयी दुनिया बसाएं,
जहां पेड़ों की छांव में हम प्रेम का गीत गाएं।
जहां हर नदी की धारा फिर से शुद्ध हो,
और हर जीव का जीवन इसमें सुरक्षित हो।
धरती का ये पुकार है, इसे न अब ठुकराएं,
उसकी सिसकियों में हमारा भी भविष्य समाया है।
इस धरती को फिर से स्वर्ग सा सजाएं,
हरियाली की चादर से उसका आँचल सजाएं।

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🌹 तुम एक खूबसूरत अहसास हो 🌹
तुम एक खूबसूरत अहसास हो,
जिसे महसूस करने के लिए आँखें बंद करनी पड़ती हैं।
फासलों का कोई मायना नहीं,
तुम तो दिल की धड़कनों में गूंजती सरगम हो।

तुम्हारे बिना भी,
हर लम्हा तुम्हारी मौजूदगी का एहसास कराता है।
जैसे सुबह की ठंडी हवा में तुम्हारी खुशबू घुली हो,
जैसे चाँदनी रात में तुम्हारी मुस्कान चमक रही हो।

तुम मेरी तन्हाइयों की रोशनी हो,
तुम मेरी थकान का सुकून हो।
दूरी चाहे हज़ारों मील की क्यों न हो,
तुम मेरी रूह का सबसे क़रीबी जुनून हो।

लोग कहते हैं मोहब्बत सिर्फ़ दिलों तक रहती है,
पर मेरे लिए तुम दुआओं का हिस्सा हो।
हर सजदे में, हर ख्वाब में,
तुम ही तो मेरी रूह की तड़प का किस्सा हो।

तुम्हें पाने की चाहत से भी बढ़कर,
तुम्हें महसूस करना ही सुकून दे जाता है।
तुम एक ख्वाब नहीं,
बल्कि वो हकीकत हो जिसे खुदा भी मुस्कुरा कर लिख जाता है।

तुम हो तो ज़िंदगी रंगों से भर जाती है,
वरना ये दिल वीरान सा लगता है।
तुम मेरी मोहब्बत की तर्ज़ हो,
तुम मेरी दास्तां का आख़िरी और सबसे हसीन फ़साना हो।

तुम एक खूबसूरत अहसास हो,
जिसका कोई नाम, कोई पहचान नहीं,
सिर्फ़ दिल की धड़कनों और रूह की गहराइयों में
हमेशा ज़िंदा रहने वाला इश्क़ हो।

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🌹 ज़िन्दगी तुम बिन 🌹

ज़िन्दगी तुम बिन एक अधूरी किताब है,
हर पन्ना खाली, हर लफ़्ज़ बे-हिसाब है।
पल-पल तन्हा, साँसें भी बोझिल,
तुम बिन दिल का हर कोना वीरान और ग़मगीन है।

सुबह की धूप अब उजाला नहीं देती,
रात का चाँद भी सुकून नहीं लाता।
तुम बिन तो सितारे भी ख़ामोश हो जाते हैं,
आसमान का हर रंग बेरंग हो जाता है।

तुम मेरी हँसी की वजह थी,
तुम मेरी साँसों का आसरा थी।
अब तो हर धड़कन सिर्फ़ तुम्हें पुकारती है,
हर तन्हाई तुम्हारा नाम दोहराती है।

तुम बिन ये दिल किसी सूने घर जैसा है,
जहाँ खामोश दीवारें भी रोती हैं।
हर कोना तुम्हारी यादों से भरा है,
पर तुम्हारी कमी फिर भी सताती है।

ज़िन्दगी तुम बिन सफ़र सा तो है,
पर इस सफ़र में कोई मंज़िल नहीं।
राहें हैं, पर कोई साथ नहीं,
ख्वाब हैं, पर उनमें तेरी झलक नहीं।

तुम बिन दुआएँ भी अधूरी लगती हैं,
इबादत में भी सुकून नहीं आता।
दिल तो सजदे में झुकता है,
पर खुदा से भी तेरा ही नाम दोहराता है।

कभी सोचा था ज़िन्दगी तेरे संग हसीन होगी,
तेरी बाहों में हर ग़म ताबह हो जाएगा।
पर अब तेरे बिना जीना सीखा नहीं जाता,
हर पल तेरी याद का बोझ उठाया नहीं जाता।

तुम बिन लम्हे सदियों जैसे लगते हैं,
तुम बिन साँसें बोझिल सी लगती हैं।
ज़िन्दगी का हर रंग फीका है,
तुम बिन मोहब्बत भी अधूरी सी लगती है।

तुम अगर लौट आओ तो ये दिल फिर से मुस्कुरा उठे,
तुम अगर पास हो तो ये ज़िन्दगी सँवर जाए।
वरना ये दिल यूँ ही तड़पता रहेगा,
और ये ज़िन्दगी यूँ ही तन्हा गुज़र जाएगी।

🌙 तन्हा सा सफ़र 🌙

🌙 तन्हा सा सफ़र 🌙
🌙 तन्हा सा सफ़र 🌙


ज़िन्दगी रही है यूँ गुजर,
जैसे रात में चाँद का तन्हा हो सफ़र।
भीड़ में रहकर भी तनहा हूँ मैं,
हज़ारों के बीच में भी बेसहारा हूँ मैं।

कभी चाहा था ज़िन्दगी रंगीन हो,
हर लम्हा तेरे संग हसीन हो।
मगर किस्मत ने कुछ और ही लिखा,
अब हर ख़्वाब अधूरा, हर ख्वाहिश टूटा।

तन्हाई की चादर ओढ़े चलता हूँ मैं,
हर मोड़ पे ग़म से मिलता हूँ मैं।
न कोई हमसफ़र, न कोई हमराज़,
बस यादों की परछाइयों का साथ है आज।

रातें भी अब बोझिल लगती हैं,
सपनों की राहें सुनसान सी लगती हैं।
दिल का दर्द लफ़्ज़ों में उतर नहीं पाता,
आँखों का समंदर भी सब कुछ कह नहीं पाता।

हर खामोश लम्हा तेरी याद दिलाता है,
हर साँस तेरी कमी का एहसास लाता है।
कुछ पल हँसी के थे, अब सिर्फ़ ग़म हैं,
कुछ लम्हों की खुशबू अब हवा में भी नहीं।

सन्नाटे में भी तेरी हँसी सुनाई देती है,
पर तुम्हारा हाथ पकड़ना अब मुमकिन नहीं।
सिर्फ़ तस्वीरों और यादों का सहारा है,
और धड़कनों में तेरा नाम ही बाकी है।

तन्हा सा सफ़र है ये दिल का,
जहाँ मंज़िल भी धुंधली, रास्ता भी अधूरा।
हर मोड़ पर इंतज़ार की परछाई है,
हर कदम पर अकेलेपन की दास्ताँ है।

फिर भी ये दिल धड़कता है तेरे नाम पर,
हर साँस टिकती है किसी इंतज़ार पर।
शायद तू लौट आए कभी इस सफ़र में,
वरना ये ज़िन्दगी यूँ ही तन्हा कटेगी उम्र भर।

तुम बिन हर मौसम बेरंग है,
हर खुशी अधूरी, हर पल सुना सा है।
तुम मेरी दुआओं में बसते थे कभी,
अब दुआओं में भी सिर्फ़ तेरा इंतज़ार है।

शायद किसी सुबह तेरी यादों की रोशनी
मेरे अँधेरे सफ़र को रोशन कर दे।
पर अब तक तो हर रात मेरे ग़मों में खोई है,
और मैं बस तुम्हारी यादों के सहारे जी रहा हूँ।

तन्हा सा सफ़र, ये अधूरी कहानी,
जिसे सिर्फ़ मेरा दिल समझता है।
हर धड़कन में तेरा नाम,
हर साँस में तेरा अहसास,
और हर लम्हा बस तन्हाई का साथी।

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## 🌹 तेरी जुस्तजू 🌹

जुस्तजू-ए-तेरी दिल-ए-नादा करता है,
कमबख़्त तन्हाई में बेपनाह तड़पता है।

हर साँस में तेरा नाम बसता है,
हर ख़्वाब में तेरा असर रहता है।

वो चेहरे का नूरानी हँसी,
वो आँसुओं की खामोशी,
सब कुछ दिल-ए-बेख़ुदा को चीर जाता है।

तेरी यादें जैसे चाँदनी-ए-रात का साया,
हर कोने में तेरी मौजूदगी का एहसास।
मगर तू दूर है, और मैं तनहा हूँ,
तन्हाई-ए-ये दिल की दास्ताँ किसी से बयाँ नहीं होती।

कमबख़्त मोहब्बत की जज़्बात,
हर पल तेरा इंतज़ार करती हैं।
दिल-ए-बेख़बर अब भी आशिक़ है,
तेरे नाम की दुआओं में लिपटा रहता है।

तेरी जुस्तजू में ये दिल थकता नहीं,
तन्हा-ए-सफ़र में भी तेरी तस्वीर मुस्कुराती है।
कभी लौट आओ उस राह में,
जहाँ सिर्फ़ हम और हमारी मोहब्बत हो।

हर पल तेरी यादों का असर है,
हर साँस में तेरा नाम है,
और हर धड़कन बस तेरी तलाश करती है।

दिल-ए-नाज़ुक अब भी तड़पता है,
तेरे बिना ये जहाँ सूना है।
कमबख़्त तन्हाई में हर लम्हा,
तेरी जुस्तजू में कटता है।

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🌹 जान एलिया की एकतरफा मोहब्बत शायरी 🌹

🌹 जान एलिया की एकतरफा मोहब्बत शायरी 🌹
🌹 जान एलिया की एकतरफा मोहब्बत शायरी 🌹


1.

अब मेरी कोई ज़िन्दगी ही नहीं,
अब भी तुम मेरी ज़िन्दगी हो क्या?
2.

मुझे अब तुमसे डर लगने लगा है,
तुम्हें मुझसे मोहब्बत हो गई क्या?
3.

सोचता हूँ कि उसकी याद आखिर,
अब किसे रात भर जगाती है?
4.

ये नज़रे भी अजीब होती हैं,
देखो तो दर्द देती हैं, नज़रें हटो तो खलती हैं।
5.

मैं ख़ामोश रहा, क्योंकि मुझे पता था,
इस मोहब्बत में सिर्फ़ तड़पना मेरा हिस्सा है।
6.

तुम्हारे बिना जीना भी क्या जीना,
हर लम्हा अधूरा, हर ख्वाब अधूरा।
7.

तन्हाई में तेरी यादें बार-बार आती हैं,
और दिल-ए-बेख़ुदा सिर्फ़ तुझसे बातें करता है।

🌟 Motivational Poetry in Hindi 🌟
1.
हर सुबह नई शुरुआत है
हर कदम एक अवसर है
हिम्मत रखो और आगे बढ़ो
क्योंकि जीत तुम्हारे इंतजार में है

2.
संघर्षों से मत डरना
क्योंकि कठिन राहें ही मंज़िल तक ले जाती हैं
जो गिरते हैं वही उठना सीखते हैं
और वही असली विजेता कहलाते हैं

3.
अपने सपनों को मत छोड़ो
हर कठिनाई में उनसे बातें करो
सपने ही तुम्हारी दिशा दिखाते हैं
और हौसला उन्हें सच करने की ताक़त है

4.
रुकना मत, थकना मत
हर पल सीखो, हर पल बढ़ो
क्योंकि सफलता उनके कदम चूमती है
जो निरंतर प्रयास करते हैं

5.
असफलता का डर छोड़ दो
क्योंकि हर असफलता एक सबक है
जो सीखते हैं वही आगे बढ़ते हैं
और अपने मुकाम तक पहुँचते हैं

6.
अपने लक्ष्य को आंखों में रखो
हर बाधा को चुनौती समझो
कभी हार मत मानो
क्योंकि मेहनत का फल मीठा होता है

7.
आज का संघर्ष कल की सफलता है
आज का दर्द कल की ताक़त है
धैर्य और हौसले से अपने कदम बढ़ाओ
और अपने सपनों को सच करो

8.
सिर्फ़ सोचने से काम नहीं होता
हौसला चाहिए, मेहनत चाहिए
हर कोशिश में अपना सर्वस्व लगाओ
तभी सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी

9.
अंधेरे से मत डरना
क्योंकि रात के बाद ही सुबह आती है
हर कठिनाई एक अवसर है
अपने आप को साबित करने का

10.
विश्वास रखो अपने आप पर
सपनों को सच करने की क्षमता तुममें है
कठिन रास्ते ही महान मंज़िल तक ले जाते हैं
तो चलो, अपने हौसले को उड़ान द

11
हर मुश्किल सिर्फ़ एक चुनौती है
जो पार करोगे वही असली जीत है
हिम्मत और मेहनत से रास्ता बनाओ
और अपने सपनों को अपनी ताक़त बनाओ

12
अकेले चलना मत डरना
क्योंकि अकेला वही है जो आगे बढ़ता है
जो प्रयास करता है वही इतिहास बनाता है
और अपनी पहचान खुद बनाता है

13
हार सिर्फ़ एक शब्द है
जो जीत के रास्ते में रुकावट बनता है
हिम्मत रखो और बढ़ते रहो
क्योंकि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती

14
सपनों को छोड़ना मत
क्योंकि वे ही तुम्हारे भविष्य की नींव हैं
जो रोज़ मेहनत करता है
वही एक दिन मुकाम तक पहुँचता है

15
असफलता से मत डरना
हर असफलता में छुपा है एक नया अवसर
सीखो, बढ़ो, और प्रयास करते रहो
सफलता खुद तुम्हारे कदम चूमेगी

16
आज जो संघर्ष कर रहे हो
वही कल तुम्हारे लिए शक्ति बन जाएगा
हर चुनौती को गले लगाओ
क्योंकि ये तुम्हें मजबूत बनाती हैं

17
अपने इरादों को मजबूत रखो
हर मुश्किल को पार करने की ताक़त रखो
विश्वास रखो अपनी मेहनत पर
और सफलता तुम्हारे करीब आएगी

18
रास्ता लंबा है, कठिन है
पर हिम्मत रखो, कभी मत झुको
जो निरंतर चलते हैं
वही मंज़िल तक पहुँचते हैं

19
हर दिन एक नया अवसर है
हर सुबह एक नई उम्मीद है
हौसला रखो और आगे बढ़ो
तभी जीवन में परिवर्तन आएगा

20
सपनों को सच करने का साहस रखो
मेहनत को अपनी आदत बनाओ
विश्वास रखो अपने आप पर
और हर बाधा को अपनी ताक़त बनाओ
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21
सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं
सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते

22
मुश्किलें आएँगी, पर हिम्मत मत हारो
असली जीत वही है जो धैर्य से पाई जाती है

23
हर अंधेरा एक नई सुबह लाता है
बस उम्मीदों की किरण को मत खोना

24
जो गिरते हैं वही उठना सीखते हैं
और वही अपने मुकाम तक पहुँचते हैं

25
हौसले से बड़ी कोई ताक़त नहीं
और आत्मविश्वास से बड़ा कोई हथियार नहीं

26
आज का संघर्ष कल की सफलता है
आज का दर्द कल की ताक़त है

27
अपने आप पर विश्वास रखो
क्योंकि तुम खुद अपने सपनों के निर्माता हो

28
हर दिन एक नया अवसर है
हर पल सफलता की राह दिखाता है

29
मेहनत की कोई कीमत कभी बेकार नहीं जाती
जो लगन से प्रयास करता है वही जीतता है

30
असफलता केवल अनुभव देती है
और अनुभव ही सफलता की कुंजी है
FAQ
छोटी सी कविता हिंदी में

ये आसमान नीला सा

ये आसमान नीला निल्ला सा लगता
बहुत प्यारा प्यारा सा दिखता
हवा में कोई मीठी खुशबू है
लगता जैसे दिल मेरा मुस्कुराता

सूरज की किरणें हल्की सी चमकती
और बादल धीरे-धीरे बहकते
पेड़ों की शाख़ों पर पंखुड़ियाँ हिलती
जैसे कोई कहानी softly सुनाती

नदियों की लहरें चुपचाप बहती
संगीत सा कोई सुर गुनगुनाती
ये नीला आसमान, ये मीठी हवा
हर पल मेरी आत्मा को छू जाती


सुंदर कविता हिंदी में


सुंदर कविता हिंदी में
सुंदर कविता हिंदी में

ये धरा

ये धरा हमारी, ममता का दरिया है
जैसे माँ की गोदी, हर दुख का सहारा है

उसकी मिट्टी में स्नेह की खुशबू है
जैसे माँ के आंचल में छुपा जादू है

हरियाली उसकी हँसी सी बिखरती है
बरगद की छाया माँ की छाँव सी लगती है

नदियाँ बहतीं जैसे लोरी सुनाती हों
पंछियों की बोली जैसे माँ बुलाती हों

सूरज की किरनें उसकी आँखों का नूर हैं
बारिश की बूँदें उसके आँचल के दौर हैं

ये धरा सिर्फ़ ज़मीन नहीं, माँ का रूप है
इसकी गोद में ही जीवन का सारा सुख है


हिंदी की महान कविताएं

1. पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी

हिंदी की महान कविताएं1. पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी
हिंदी की महान कविताएं1. पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी

“चाह नहीं मैं सुन्दर गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ।
चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं देवताओं के सिर पर चढ़ाया जाऊँ।
मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जाएँ वीर अनेक।”

2. कोशिश करने वालों की हार नहीं होती – हरिवंश राय बच्चन

2. कोशिश करने वालों की हार नहीं होती – हरिवंश राय बच्चन
2. कोशिश करने वालों की हार नहीं होती – हरिवंश राय बच्चन

“लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।”

3. पुष्प की तरह खिलो – सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

3. पुष्प की तरह खिलो – सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
3. पुष्प की तरह खिलो – सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

“वह तोड़ता फूल,
मैं देखता हूँ उसे तोड़ते हुए।
वह तोड़ता फूल,
जैसे वह एक खिलौना हो।
पर फूल खिलता है,
मुस्कराता है,
कभी चुपचाप, कभी लहराता है।
ओ मनुष्य! तुम भी पुष्प की तरह खिलो,
और अपने जीवन को सुगंधित बनाओ।”

4. सरफ़रोशी की तमन्ना – रामप्रसाद बिस्मिल

4. सरफ़रोशी की तमन्ना – रामप्रसाद बिस्मिल
4. सरफ़रोशी की तमन्ना – रामप्रसाद बिस्मिल

“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-क़ातिल में है।
ऐ वतन, करता नहीं क्यों दूसरी कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।”

5. वह तोड़ती पत्थर – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला

5. वह तोड़ती पत्थर – सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला
5. वह तोड़ती पत्थर – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला

“वह तोड़ती पत्थर,
देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर।
वह तोड़ती पत्थर,
कोई न छायादार पेड़, वह जिसके तले बैठी हो।
कोई न उसे कभी बोला, ‘बहुत थक गई हो?’
कोई न आया पास, न कोई आया साथ।”


मोटिवेशनल कविता हिंदी में

पर्वत सा ऊँचा उठो

मोटिवेशनल कविता हिंदी मेंपर्वत सा ऊँचा उठो
मोटिवेशनल कविता हिंदी मेंपर्वत सा ऊँचा उठो

तुम पर्वत सा ऊँचा उठो,
लाख कठिनाई आए न झुको।
आंधी आए, तूफ़ान गरजे,
फिर भी अपने पथ पर बढ़ो।

जो ठान लिया, वो करना ही है,
जीवन को सुंदर गढ़ना ही है।
पसीने की हर एक बूँद से,
सपनों का दीप जलाना ही है।

तपती धूप जला दे तन को,
फिर भी हिम्मत मत खोना मन को।
संध्या ढले या अंधकार छाए,
प्रकाश बनो तुम हर जीवन को।

राह भले ही काँटों से भरी हो,
हिम्मत से ही मंज़िल करी हो।
सच के आगे सिर मत झुकाना,
सत्य तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति हो।

मेहनत से ही जग सम्मान मिलेगा,
हर संघर्ष से नयी पहचान मिलेगा।
गिरकर फिर से उठ खड़े होना,
यही असली जीवन का सौगात मिलेगा।

तुम पर्वत सा ऊँचा उठो,
हर सपना साकार करो।
अपनी शक्ति का जग को एहसास दो,
हर दिल में प्रेरणा का प्रकाश भरो।


4 लाइन की कविता हिंदी में

🌅 सुबह की किरन

🌅 सुबह की किरन
🌅 सुबह की किरन

सुबह की पहली किरण मुस्कान लाए,
हर दिल में नयी उमंग जगाए।
अंधियारे को दूर कर दे क्षण में,
जीवन को रोशन कर दे हर मन में।


हिंदी बाल कविता

हिंदी बाल कविता 🌙 चंदा मामा
हिंदी बाल कविता🌙 चंदा मामा

🌙 चंदा मामा
चंदा मामा आए रथ लेकर,
तारों का झोला साथ में भरकर।
रात की गोदी में खेल खिलाएँ,
मीठे सपनों का गीत सुनाएँ।

तारों संग लुकाछिपी खेलें,
बच्चों को अपने पास बुलाएँ।
गोल मटोल सी उनकी सूरत,
हँसकर सबके मन को भाएँ।

नीली चादर ओढ़े गगन में,
झिलमिल तारे नाचें संग मन में।
मामा कहते – “सो जाओ प्यारे,
सपनों में मिलेंगे हम तुम्हारे।”

रात की रानी खुशबू फैलाए,
झूमे हवा लोरी गुनगुनाए।
बच्चे मस्ती में झूम झमकें,
सपनों के पंखों पर उड़ झलकें।

चंदा मामा जब मुस्काएँ,
सपनों के फूल महक जाएँ।
बाल मन का ये प्यारा रिश्ता,
हमेशा दिल को भाता जाए।


हिंदी पुराने कवियों की प्रसिद्ध कविताएं

🌸 कबीरदास – (भजन)


माया महाठगिनी हम जानी

🌸 कबीरदास – (भजन)माया महाठगिनी हम जानी
🌸 कबीरदास – (भजन)माया महाठगिनी हम जानी

माया महाठगिनी हम जानी
तिरीगुन फाँस लिये कर डोले, बोले मधुरी बानी।

केहु नाच नचावे बहुरूपिया, केहु बनावे रानी।
केहु को करे राजा, केहु को करे भिखारी।

साँची कहौं तोरि माया ठगिनी, तूं ठगनि संसार।
काहे को डोलत फिरे रे मनुवा, तेरा कछू न साथ।

🌸 सूरदास – (कृष्ण लीला पद)

🌸 सूरदास – (कृष्ण लीला पद)मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो
🌸 सूरदास – (कृष्ण लीला पद)मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो


मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो

मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।
ख्याल परै यह सखियन सबै मिलि, मेरे मुख लपटायो।।

देखत नैना, कौने बलाइ, तौको काहिं लगायो।
मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।।

गोपी कहें, मोहन माखन चुरायो,
मैया सुनहु, मोहि बाँधि ले आयो।।
सूरदास जसुमति सुनि धायो,
हँसि हँसि लै गोपाल मन भायो।।

🌸 मीराबाई – (भजन)
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो।।

जनम जनम का कीना बिछुरन, सो अब हिरदय समायो।
सत की नाव खेवन हार गुरू, भवसागर तरि जायो।।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख हरख जस गाया।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।।

सिया राममय सब जग जानी।
करहु प्रणाम जोरि जुग पानी।।

🌸 तुलसीदास –

🌸 तुलसीदास –सिया राममय सब जग जानी
🌸 तुलसीदास –सिया राममय सब जग जानी


सिया राममय सब जग जानी

शिव बिरंचि सनकादि मुनि नारद,
सारद सहित, सदा सेवक चाकर।।

सकल भवन भरि मोर गुसाईं।


10 लाइन की कविता हिंदी में

सकल भवन भरि मोर गुसाईं।10 लाइन की कविता हिंदी में
सकल भवन भरि मोर गुसाईं।10 लाइन की कविता हिंदी में

 ज़िंदगी का सफ़र

ज़िंदगी एक किताब है अधूरी सी,
हर पन्ने में बसी है कहानी पुरानी सी।

कभी हँसी, कभी आँसू लेकर आती है,
कभी उजाला, कभी साया बन जाती है।

मंज़िल की तलाश में चलते ही जाना है,
ठोकर खाकर भी फिर से उठ जाना है।

सपनों को हकीकत में ढालना होगा,
मुश्किलों से हर रोज़ टकराना होगा।

आसमान छूने का हौसला रखना है,
ज़िंदगी को मुस्कुराकर जीना ही अपना मकसद रखना है।

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