ज़िंदगी की कशमकश… कभी खुद से, कभी दुनिया से।

कशमकश में कटे दिन, सबसे भारी होते हैं।

जो मिला नहीं, वही सबसे ज़्यादा याद आता है।

दर्द भी सीने में गहराई छोड़ जाता है।

ना पूरी तरह साथ, ना पूरी तरह दूर — सब कुछ अधूरा।

कशमकश ने सिखाया— सुकून महंगा है।

बात वही चुभती है, जो दिल पर लगी हो।

कशमकश ये भी— कदम रोकूँ या बढ़ा दूँ?

दिल टूटे, सपने टूटे— फिर भी जीना पड़ता है।

कभी वक़्त बदलता है, कभी हम।

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कशमकश जितनी गहरी होती है, शख्स उतना ही मजबूत बनता है।

ज़िंदगी की उलझनों से मत डरो— यही तुम्हें खास बनाती हैं