बेकरारी शायरी/Bekarari Shayari
बेकरारी शायरी/Bekarari Shayari- बेकरारी और बैचैनी इन्सान की जिन्दगी में सुमार हो चूका है अज के भागदौड की दुनियां में ये संभव नही की इन्सान बेकरार न हो , इस बेकरारी ने इन्सान का जीना दुस्वार किया हुआ है, जहाँ देखो बस बेकरारी है , जब आम जिन्दगी में इन्सान पल पल बेकरार है , … Read more