उलझन ये नहीं की तू बेवफा क्यू है मुश्किल ये है दिल तुझपर अटका क्यू है
अब दिल को चैन नहीं आता दर्द के बगैर कमबख्त 💗 को दर्द की आदत हो गई
हसरतें रहीं दिल ही दिल में हम कुछ कह न सके महफ़िल में
टूटे हुए दिल और टूटे हुए खिलौने किस काम के बस ुयूँ ही बेवजह बेकाम से 💔💔
टूटकर बिखरने का शौक था मुझे 💔💔 शायद यही सोच के मोहब्त हुई मुझे