तूफान और कश्ती 💔 दिल को छू लेने वाली शायरी

कश्ती चली… साथ भी था…

लहरें तेज थीं… पर दर्द अंदर था…

भँवर गहरा था… और मैं अकेला…

जिसे सहारा समझा… वो ही छोड़ गया…

कश्ती डगमगाई… दिल टूट गया

तूफान थम गया… पर सन्नाटा रह गया…

अब लहरों से डर नहीं… लोगों से है…

कश्ती बच गई… पर मैं बदल गया…

अब सफर मेरा है… और सहारा भी…

“अब डर नहीं लगता तूफानों से,

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पूरी शायरी जरूर पढ़ना…

अब मेरी कश्ती भी मेरी है, और मेरा सफर भी…