भँवर गहरा था… और मैं अकेला…
जिसे सहारा समझा… वो ही छोड़ गया…
कश्ती डगमगाई… दिल टूट गया
तूफान थम गया… पर सन्नाटा रह गया…
अब लहरों से डर नहीं… लोगों से है…
कश्ती बच गई… पर मैं बदल गया…
अब सफर मेरा है… और सहारा भी…
अब मेरी कश्ती भी मेरी है, और मेरा सफर भी…