मैं धरती हूँ… तुम्हारा घर।

तुम्हें जन्म दिया… बिना शर्त।

पेड़ दिए… सांस लेने को।

नदियाँ दीं… जीवन देने को।

हवा दी… जीने के लिए।

पर तुमने क्या दिया मुझे?

काट दिए मेरे हरे सपने।

जला दिए मेरे जंगल।

जहर घोल दिया मेरी हवाओं में।

मेरी नदियाँ… अब रोती हैं।

मेरी मिट्टी… अब बंजर है।

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जानवर… बेघर हो गए।

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