🌿 प्रकृति की पुकार अब धीमी पड़ गई, हमने जंगलों को इमारतों से बदल दिया।
साँसों में अब शहर का धुआँ है, खुले आसमान का नीला रं.ग भी धुंधला पड़ा है।
💔 शहरों ने हमें जोड़ा नहीं, तोड़ा है, हर कोई अपनी ही दुनिया में खोया है।
💚 विश्व शहर दिवस का संदेश: स्मार्ट शहर वही, जहाँ इंसानियत और प्रकृति साथ जिएँ।